अक्तूबर ४, २०१८
लन्दनमें २०२० के महापौर मतदानके लिए ब्रिटेनमें सत्तारूढ ‘कंजर्वेटिव दल’के उम्मीदवार १३ वर्ष पूर्व हिन्दुओं और मुसलमानोंके बारेमें अपने विचारके कारण बुधवारको आलोचनाओंसे घिर गए । लन्दनके महापौर सादिक खानके विरुद्घ कंजर्वेटिव उम्मीदवार शॉन बैलेने २००५ में ‘सेंटर फॉर पालिसी स्टडी’के लिए एक ‘नो मैन्स लैंड’ नामक प्रचार पुस्तिका (पैम्फ्लेट) तैयार किया था, जिसमें उन्होंने ब्रिटेनके सांस्कृतिक परिदृश्यमें हिन्दु और मुस्लिम प्रभावपर बोला था, “आप अपने बच्चोंको लेकर विद्यालय आए और वे क्रिसमसके स्थानपर दीवालीके बारेमें बहुत कुछ सीखेंगे । मैं देख रहा हूं कि बच्चोंकी छुट्टी मुस्लिम और हिन्दू त्यौहारोंके आधारपर होती है । क्या यह ब्रिटिश समुदायको उसकी जडोंंसे काटनेका प्रयास है ? एक स्थानके रूपमें ब्रिटेनमें बहुत सी अच्छी बातें हैं और ब्रिटिश लोगोंमें भी बहुत कुछ सराहनीय है । यदि ब्रिटिश लोग जिस धर्ममें विश्वास करते हैं, उसे ही समाप्त किया जाने लगे, यदि हमारे मूल्योंको ही हमसे दूर किया जाने लगे तो क्या होगा ? उन्होंने कहा था, ‘यदि हम दूसरे धर्म और संस्कृतिके लोगोंको ब्रिटेनमें रहने और अपनी मान्यताओंके प्रसारकी अनुमति दे देंगे तो इसके कुछ गम्भीर परिणाम हो सकते हैं !”
बता दें कि यह वही सादिक खान हैं, जिन्होंने सितम्बरमें वक्तव्य जारी करते हुए ब्रेक्सिटपर पुनर्मतदान करानेकी अपील की थी ।
“वस्तुत: आपके तथाकथित धर्मने ही युवाओंको विवाह परम्परासे हटा वैश्यावृत्तिकी ओर धकेला है, जिसके कारण आपका शासन ही मुसलमानों अथवा हिन्दुओंको निमन्त्रण दे रहा है”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : जी न्यूज
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