मार्च १६, २०१९
पूरे परिवारके तीव्र विरोधके पश्चात भी उस युवतीने हिन्दू धर्मको त्यागकर इस्लाम अपनाया तथा मुस्लिम युवकसे निकाह किया था । युवतीके परिजनोंने उसे समझाया, लव जिहादसे अपने स्वर्णिम जीवनको नष्ट करनेवाली सभी हिन्दू युवतियोंकी आपबीती उसे सुनाई गई; परन्तु वह किसी भी स्थितिमें मुस्लिम युवकको नहीं छोडनेको सज्ज थी । वह कहती थी कि उसका प्रेम सच्चा है तथा वह उसीके साथ जिएगी और मरेगी । उसने इस्लाम अपनाया तथा मुस्लिम युवकके साथ निकाह कर लिया । अब मुस्लिम युवक उसे छोडकर दूसरे निकाहके लिए सज्ज है ।
प्रकरण उत्तर प्रदेशकी यमुनानगरी आगराके न्यू आगरा थाना क्षेत्रका है । अप्रैल २०१८ में थाना न्यू आगराकी एक युवतीने अपने घरसे विरोधकर दूसरे धर्मके युवकसे निकाह किया था । युवतीका कहना है कि उसने धर्म परिवर्तन किया और युवक उसे लेकर देहलीमें रहने लगा । यहां उसके साथ कई प्रताडनाएं हुई । युवतीने आरोप लगाया कि एक दिन उसके पतिने दूसरे निकाहकी बात कही ! जब उसने विरोध किया तो उसके साथ मारपीट की गई ! १९ फरवरीको धर्मान्ध पति तथा ससुरालजनोंने उसपर दबाव बनाया । देवरने उसके साथ दुष्कर्म करनेका प्रयास किया, इसका विरोध करनेपर उसे घरसे निकाल दिया !
इसके पश्चात युवतीने रोते हुए आगरामें पुलिसकी शरण ली । एसएसपी कार्यालय पहुंचकर प्रार्थना पत्र दिया । थाना हरीपर्वत पुलिसने इस सम्बन्धमें दोनों पक्षोंको बुलाया और सन्धि करनेका प्रयास किया; परन्तु युवतीने अभियोग प्रविष्ट करानेकी मांग की । पुलिसने दहेज उत्पीडन, छेडछाड सहित अन्य धाराओंमें अभियोग प्रविष्ट किया है । युवतीका कहना है उसके पति तथा ससुरालजनोंको कडा दण्ड दिया जाए, ताकि उसकी भांति किसी और युवतीका जीवन नष्ट होनेसे बच पाए ।
“परिजनोंके समझानेपर भी युवती नहीं मानी; क्योंकि न ही उसमें धर्मके संस्कारोंका लेश मात्र भी था और न ही विवेक जागृत था ! वह भी आजकी अन्य युवतियोंकी भांति वासनामें अन्धी होकर अपना जीवन नष्ट करनेको सज्ज थी, तभी तो उसे सत्यसे अवगत करानेपर भी उसे धर्मान्ध पतिमें चलचित्रके खान कलाकार दिखे कि उसकेवाला तो वही खान है तो ऐसा क्यों करेगा ? जबकि सय इसके विपरित होता है ! धर्मान्धोंको मौलानाओं और मस्जिदोंसे यही आदेश मिलता है तो वह ऐसा ही करेगा, इसे सभी हिन्दू युवतियां मस्तिष्कमें बैठा लें ! हिन्दू माता-पिता भी ऐसे प्रकरणमें कठोर निर्णय लेना सीखे और अधिक नहीं तो थोडे बहुत संस्कार तो बालकोंमें डालें ताकि वे विवेकसे निर्णय ले पाएं ! धन अर्जित कर बच्चोंको देकर अपनेको बडभागी समझनेवाले हिन्दू स्मरण रखें कि साधना व संस्कार ही सबसे बडे धन हैं, उन्हें अपनाएं !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : सुदर्शन
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