अप्रैल १५, २०१९
पश्चिम बंगालके विभिन्न भागोंमें शनिवार, १३ अप्रैलको भाजपा और विहिपद्वारा निकाली गई रैलियोंकी, जिनमें कुछ सशस्त्र रैलियां भी थी, प्रदेशकी मुख्यमन्त्री ममता बनर्जीने कडी आलोचना की है । अधिकारियोंने बताया कि पश्चिमी मिदनापुर, पुरूलिया, झाडग्राम, बांकुरा, हावडा, कोलकाता और उत्तर एवं दक्षिण २४ परगना जनपद सहित कई स्थानोंमें रामनवमीकी रैलियां निकाली गई । पश्चिमी मिदनापुरके खडगपुरमें भाजपाके प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोषने रामनवमीकी रैली निकाली और वह इनमें तलवारों एवं गदाओंका प्रदर्शन करते दिखे । रैलीके बारेमें पूछे जानेपर घोषने कहा, ‘‘रामनवमीकी रैली हमारी परम्पराका अंग है । हम अपनी रक्षाके लिए शस्त्र लेकर चल रहे थे । इसका चुनावोंके साथ कोई सम्बन्ध नहीं है । यदि तृणमूल कांग्रेसको शस्त्र रैलियोंसे समस्या है तो उन्हें अपने सोचनेके ढंगको परिवर्तित करना चाहिए ।’’
मुख्यमन्त्री ममता बनर्जीने सिलिगुडीमें एक रैलीमें शस्त्र रैलियां निकालनेके लिए भाजपाकी आलोचना की और कहा कि वे राजनीतिक लाभके लिए ‘धर्मको बेचने’का प्रयास कर रहे हैं । उन्होंने भाजपापर लोगोंको भ्रमित करनेके लिए धर्मका उपयोग करनेका आरोप लगाया । कोलकाता पुलिसने बताया कि नगरमें किसी भी राजनीतिक, गैरराजनीतिक और धार्मिक संगठनोंको बाइक रैली निकालनेकी अनुमति नहीं दी गई । पश्चिम बंगाल पुलिसने शस्त्रोंके साथ रामनवमी रैली निकालनेकी आज्ञा नहीं होने देनेकी बात कही ।
“ममता बैनर्जी राम नवमीकी शोभायात्रासे उद्विग्न हो रही हैं, वहीं बकरीदपर तेजधार शस्त्रोंसे कटनेवाले पशु इन्हें धार्मिक और भाईचारेका सन्देश देनेवाले लगते हैंं !! ऐसे ही मन्दिरोंमें पूजा रोके जाने और हिन्दू त्यौहारोंपर ममता शासनद्वारा प्रतिबन्ध लगानेके अनेकानेक समाचार आते रहे हैं तो ममता अब स्वयं बताएं कि धार्मिक आधारपर देशको कौन विभाजित कर रहा है ? यदि ममता बैनर्जीको समस्या इस बातसे है कि यह रैली भाजपाने निकाली है तो ममता स्वयं आगे आए और श्रीरामकी शोभा यात्रा निकालें; परन्तु सम्भवतः इफ्तार भोज करानेवाली मुख्यमन्त्रीका मुस्लिम वोटबैंक खिसक जाएगा !! रोहिंग्याओंको देशकी सीमामें घुसाकर उनका उत्पात करना, हिन्दुओंपर कुदृष्टि डालना, राम नवमीकी रैलीमें तलवारोंद्वारा प्रदर्शनसे कहीं अधिक भयावह है, क्या मुख्यमन्त्रीको यह दिखाई नहीं देता है ? ममता प्रथम उसे नियन्त्रित करें, उसीमें बंगालकी और देशकी भलाई है, राम और हिन्दू तो पहलेसे ही शान्त और शान्तिके प्रतीक है ।”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : नभाटा
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