‘शिवलिंग होता तो कबका तोडकर हटा देते’: ज्ञानवापीपर ‘मौलाना’ सरफराज अहमदने दोहराया, उद्घोषकने पूछा – पैगम्बर मुहम्मदपर कोई ऐसा बोले तो ?
३१ मई, २०२२
काशीके ज्ञानवापी विवादित ढांंचेके भीतरके नूतन चलचित्र सामने आनेके पश्चात ये लगभग स्पष्ट हो गया है कि शिवलिंगके साथ छेडछाड की गई थी और जिसे ‘मस्जिद’ कहा जाता है, उसके भीतर मन्दिर होनेके अनेक प्रमाण उपस्थित हैं । अब सरफराज अहमद नामके एक ‘मौलाना’ने ‘ऑफ द रिकॉर्ड’ कहा कि किसी समयमें ये मन्दिर था । मन्दिर तोडकर ‘मस्जिद’ बना दी गई, इसमें कोई संशयकी बात नहीं है । ज्ञानवापीके विषयमें कोई प्रमाण भी नहीं है; क्योंकि प्रपत्र लेकर ‘अंग्रेज’ लंदन चले गए थे । ‘Zee Hindustan चैनल’ने जब ‘मौलाना’ सरफराजसे इस वक्तव्यको लेकर पूछा तो उन्होंने कहा कि उन्होंने ‘ऑफ द रिकॉर्ड’ भी ये बात कही थी और अब ‘ऑन द रिकॉर्ड’ भी कह रहे हैं कि यदि वहांं शिवलिंग होता तो उसे कबका तोडकर हटा देते । इसपर समाचार उद्घोषकने प्रत्यूष खरेने पूछा कि यदि यही बात पैगम्बर मुहम्मदके विषयमें किसीने कह दी होती तो ‘बवाल’ मच जाता और ‘मौलाना’ सरफराज अहमद इसी ‘चैनल’पर क्षमा मंगवानेकी बात कह रहे होते ।
उल्लेखनीय है कि सर्वेक्षणके ‘लीक’ फीतिचित्रमें ‘मस्जिद’के ‘वजूखाना’के भीतर शिवलिंग स्पष्ट दिख रहा है । साथ ही ‘तहखानों’की भीतोंपर स्वस्तिक, त्रिशूल, कमल और हिन्दू देवताओंके रूपांतरण उकेरे हुए दिखाई दे रहे हैं ।
‘मौलाना’का शिवलिंग तोडनेका वक्तव्य घृणास्पद है, इस हेतु इसे बन्दी बनाकर दण्डित किया जाना चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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