स्मरामि नित्यं देवेशि त्वया प्रेरित मानसः ।
त्वदाज्ञा शिर धृत्वा भजामि परमेश्वरीम् ।।
।। ॐ महालक्ष्म्यै नमः ।।
अर्थ : हे देवी, मैं आपका नित्य समरण करता हूं और आप हमारी प्रेरणास्रोत हैं ! आपकी आज्ञा शिरोधार्य कर, हे परमेश्वरी, आपकी स्तुति करता हूं ।
Leave a Reply