हिन्दू लडकियोंको भोजनमें मांस, बलपूर्वक ‘क्रॉस’ बांधकर बाइबल पढनेको विवश, कोलकाताकी पैशाचिक संस्थापर हुई प्राथमिकी
१५ दिसम्बर, २०२१
गुजरातमें ‘मदर टरेसा’द्वारा स्थापित की गई एक ईसाई संस्था ‘मिशनरीज ऑफ चैरिटी’के बालगृहपर धर्म-परिवर्तनका आरोप लगा है । गुजरात धर्म स्वतन्त्रता अधिनियम-२००३ की धारा-२९५ (ए) के अन्तर्गत, वडोदरा नगर स्थित इस बालगृहपर हिन्दुओंकी धार्मिक भावनाओंको व्यथित किया है । लडकियोंको ईसाई धर्म अपनानेके लिए प्रलोभन देनेका प्रयास किया है । जनपद सामाजिक सुरक्षा अधिकारी मयंक त्रिवेदीके परिवादपर प्राथमिकी प्रविष्ट की गई कि बालगृहमें लडकियोंको ईसाई धर्मकी पुस्तकोंको पढने और ईसाई धर्मकी प्रार्थनाओंमें भाग लेनेके लिए विवश किया जा रहा था । ‘मिशनरीज ऑफ चैरिटी’के एक प्रवक्ताने कहा, “हमारे बालगृहमें २४ लडकियां हैं । ये लडकियां हमारे साथ रहती हैं और हमने किसीका धर्म परिवर्तन नहीं किया है और न ही किसीको ईसाई धर्ममें विवाह करनेके लिए विवश किया है ।”
ईसाई मिशनरियोंने सदा ही धन, कार्य, औषधियां तथा अन्य सुविधाओंका लोभ दिखाकर हिन्दुओंका धर्मान्तरण करते हैं । ऐसी संस्थाओंपर त्वरित प्रतिबन्ध अति आवश्यक हो गया है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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