मई ९, २०१९
देहलीके कारावासमें १०० से अधिक हिन्दू बन्दी मुस्लिम बन्दियोंके (कैदियोंके) साथ रमजानके समय प्रातःकालसे सन्ध्यातक रोजा रख रहे हैं ! एक वक्तव्यमें तिहाड कारावास प्रशासनने कहा कि देहलीके केन्द्रीय कारागारमें बंद १६,६६५ बन्दियोंमेंसे २,६५८ रोजा रख रहे हैं और २,६५८ मेंसे ११० हिन्दू हैं ! वक्तव्यके अनुसार ३१ हिन्दू महिलाएं और १२ हिन्दू युवा बन्दी रमजानके माहमें रोजा रख रहे हैं ! अधिकारियोंके अनुसार ‘सहरी’ और अन्य नमाजको देखते हुए निर्धारित भोजनकी उपलब्धता सुनिश्चित करनेके लिए ‘लंगर’के समयमें परिवर्तन किया गया है ।
अधिकारियोंने कहा, ‘‘बन्दियोंके भोजन संग्राहलयमें (कैंटीनमें) रूह आफजा, खजूर और ताजे फलोंका पर्याप्त भण्डार है, जिसे ये लोग क्रय कर सकते हैं । सभी केन्द्रीय कारावासमें ‘रोजा इफ्तार’की भी व्यवस्था की गई हैं ।’’ उन्होंने बताया कि धार्मिक और परमार्थ संगठनोंको कारावासके भीतर बन्दियोंके साथ नमाज और ‘रोजा इफ्तार’के आयोजनकी अनुमति है ।
“क्या ये जो १०० हिन्दू बन्दी रोजा रख रहे हैं, क्या इन्होंनें अभी ऐसे नवरात्रि आदिका व्रत किया है ? यदि रखा भी है तो क्या अन्य मुसलमान भी नवरात्रि रखेंगें ? सम्भवतः नहीं ! हिन्दू आरम्भसे न स्वयं ही धर्मपालन करते हैं और न ही अपनी सन्तानोंसे करवाते हैं । जिससे उनमें हिन्दू धर्मके प्रति धर्माभिमान जागृत नहीं होता है; परन्तु एक शिक्षा उन्हें अवश्य दी जाती है, वह है तथाकथित भाईचारा, जिसके परिणामस्वरूप वह एकपक्षीय भाईचारा दिखानेके लिए स्वधर्म पालन न करनेवाले हिन्दू परधर्म पालन करने लगते हैं और विडम्बना है कि यह केवल हिन्दुओंकी ओरसे ही होता है ! धर्मजागृति ही इसका एकमात्र समाधान है, जिससे हिन्दू उचित-अनुचितका निर्धारण सीख सकते हैं !” – सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : जनसत्ता
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