मूली (दीर्घकन्द, Raddish), भूमिके भीतर उत्पन्न होने वाली सब्जी है । वस्तुतः यह एक रूपांतरित प्रधान जड है, जो पूरे विश्वमें उगाई एवं खाई जाती है । मूलीका उपयोग भोजन और औषधि दोनों रूपमें किया जाता है । मूलीके साथ-साथ उसकी पत्तियां और बीजके भी कई लाभ ज्ञात हैं ।
घटक – यह प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, कैल्शियम, फॉस्फोरस, आयरन, विटामिन-ए और पोटैशियमसे भरपूर होती है । मूली ‘विटामिन-सी’का समृद्ध स्रोत है, जो शरीरकी प्रतिरक्षा प्रणालीको सशक्त करनेमें अपना योगदान देता है ।
आइए, अब मूलीके लाभके विषयमें जानेंगें –
* हृदय रोगमें लाभप्रद – मूलीका सेवन व्यक्तिमें हृदय रोगोंको अल्प (कम) करने या रोकनेके लिए रक्तवसाके (कोलेस्ट्रॉलके) अवशोषणको कम करनेमें सहायता करता है । मूलीमें कुछ ‘फ्लेवोनोइड्स’ होते हैं, जो हृदयके लिए बहुत लाभदायक होते हैं । हृदय कार्योंका सीधा सम्बन्ध रक्तचापसे होता है । उच्च रक्तचाप प्रायः हृदयाघात जैसी गम्भीर समस्याओंका कारण बनता है । मूली रक्तचापको नियन्त्रित करती है, इसलिए यह हृदयाघातकी सम्भावनाओंको अल्प कर देती है ।
* भार कम करनेमें लाभप्रद – मूलीमें ‘फाइबर’की अधिक मात्रा पाई जाती है तथा कम वसा प्रदान करती है; इसलिए मूली जैसी सब्जियां फाइबर और जलसे भरपूर होनेके कारण भार अल्प करनेके लिए लाभप्रद हैं । यह वसाके सेवनको कम करने और चयापचयमें सुधार करनेमें भी सहायता करती है ।
* त्वचाके लिए लाभप्रद – मूलीमें जलकी अच्छी मात्रा होनेके कारण यह त्वचामें नमीको बनाए रखनेमें सहायक है । फास्फोरस, विटामिन-सी और जिंकसे समृद्ध होनेके कारण यह स्वस्थ त्वचाको बनाए रखनेमें लाभकारी है ।
* पीलियामें लाभकारी – मूली मुख्य रूपसे पीलियाके लिए उपयोगी होती है; क्योंकि यह रक्तिम-पित्तवर्णकताके (बिलीरुबिनके) स्तरको समाप्त कर, इसके उत्पादनको स्थिर करनेमें सहायता करती है । मूलीको मुख्य रूपसे प्राकृतिक उपचारके रूपमें जाना जाता है और मूलीके पत्ते प्राकृतिक उपचारके लिए सबसे उपयोगी होते हैं । मूलीके पत्तोंमें शक्तिशाली विषमुक्त प्रभाव होता है, जो विषाक्त पदार्थोंको शरीरसे बाहर करने और रक्तको शुद्ध करनेमें सहायता करता है ।
* बालोंके लिए लाभप्रद – मूलीका रस बालोंमें लगानेसे बाल सशक्त हो जाते हैं; अतः मूली बालोंके झडनेको कम करनेके लिए एक प्रभावी माध्यम है । मूलीका रस सिरमें लगाकर १०-१५ मिनट तक मर्दन(मालिश) करना चाहिए ।
* रक्तचाप और मधुमेहमें लाभप्रद – मूलीमें पोटैशियम पाया जाता है, जो रक्त वाहिकाओंको आराम देने (रिलैक्स करने) और रक्त प्रवाहमें वृद्धि करनेमें सहायता करता है । मूलीमें उपस्थित पोटैशियम, नियमित रक्त प्रवाहको बनाए रखता है, जिससे रक्तचाप कम हो जाता है । यह रक्त शर्कराके स्तरको प्रभावित नहीं करती है ।
इसके अतिरिक्त मूली कब्ज, बवासीर, पाचन-तन्त्र, यकृतके (लिवर) रोगोंमें अत्यधिक लाभप्रद है ।
सेवन विधि – मूलीको प्रायः नींबू, काला नमक आदि मिलाकर सलादके रूपमें खाया जाता है । इसके अतिरिक्त इसकी तरकारी (सब्जी) भी बना सकते हैं ।
सावधानियां –
१. मूली खानेका सही समय दिनमें होता है । कोई भी कच्ची तरकारी, रस, कच्चे फल सदैव दिनमें, दोपहरके समय ही खाने चाहिए, इससे इन्हें पचनेमें बहुत समय मिल जाता है और इनसे कफ नहीं बनता ।
२. मूलीका अत्यधिक सेवन किडनीको हानि पहुंचा सकता है । बहुत अधिक मूली खानेसे, मूत्र उत्सर्जनकेद्वारा शरीरमें जलकी न्यूनता हो सकती है, जिससे निर्जलीकरणकी समस्या उत्पन्न हो सकती है ।
३. अत्यधिक मात्रामें मूलीका सेवन रक्तचापपर बुरा प्रभाव डाल सकता है ।
४. पथरीके रोगियों और गर्भवती महिलाओंको मूलीके सेवनसे बचना चाहिए, क्योंकि इन स्थितियोंमें इसका सेवन गम्भीर समस्याओंको जन्म दे सकता है ।
Leave a Reply