हिन्दू विवाहमें ‘अल्लाहकी शान’में गीतके विरोधपर सङ्गीतकारनें आयोजकोंको ही बता डाला असहिष्णु
३० नवम्बर, २०२१
‘न्यूज पोर्टल’ ‘द क्विंट’ने २९ नवम्बर २०११ को अपने ‘वेब पेज’से उस प्रकरणको हटा दिया, जो उसने एक सङ्गीतकार अभिषेक शंकरके विषयमें साझा किया था । वहीं शंकरने अपने ‘इंस्टाग्राम प्रोफाइल’पर यह कहानी साझा की थी, जिसमें उसे ‘अल्लाहका गीत’ गानेपर रोका दिया गया था । यह तो स्पष्ट नहीं है कि ‘द क्विंट’ने कहानी क्यों हटाई ? परन्तु एक जालस्थलने (वेबसाइटने) उस ‘स्टोरी’को उठाकर अपने यहां प्रकाशित किया । जिसका शीर्षक दिया गया था, ‘टीकेवाले शख्सने हमें अल्लाह गानेसे रोका ।’ समाचारके अनुसार, अभिषेक शंकरका एक ‘बैंड’ है जो विवाह समारोहमें कार्यक्रम करता है । उन्होंने प्रकरणको साझा करते हुए बताया कि किसी हिन्दू विवाहमें ‘अल्लाहकी शान’में एक गीत बजानेपर उन्हें रोक दिया गया था । जिसपर उसने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि घृणा मात्र ‘कॉमेडियन’के लिए ही नहीं सङ्गीतकारोंको भी झेलनी पडती है । इस कथनके माध्यमसे उनका मुनव्वर फारूकीके कार्यक्रमोंके निरस्त होनेके अनुभवोंको अपने अनुभवसे जोडना था । शंकरने बताया कि जब उनकी महिला गायिकाने ‘सूफी’ गीत ‘अल्ला-हू’ गाना आरम्भ किया तो उसी मध्य अपने माथेपर तिलक लगाए एक व्यक्तिने उन्हें मंचके किनारेपर बुलाकर कहा कि ‘अल्लाह- हू’ क्या है ? क्या हम आपको मुसलमान दिखते हैं ? एक हिन्दूके विवाहमें हम यह गीत स्वीकार नहीं करेंगे । इसके पश्चात शंकरने उन्हें समझानेका प्रयास किया; परन्तु वह व्यक्ति नहीं माना और धमकी दी कि यदि गीत बजाना बन्द नहीं किया गया, तो तुम्हें बाहर कर दिया जाएगा । इसके पश्चात अभिषेक कहता हैं कि उसे अपने हाथमें ‘रक्षा’ या जनेऊ बांधनेमें भी घृणा अनुभव होने लगी । वहीं एक अन्य प्रकरणके विषयमें अपने विचार साझा करते हुए शंकर कहता हैं कि जब वह रेलयानसे जबलपुर जा रहा था, तो एक व्यक्तिने उससे उसकी दाढीके विषयमें पूछा तथा कहा कि क्या यह दाढी आपको प्रिय है या आप मुसलमान हैं ? जब लोगोंने सङ्गीतकारसे ऐसे प्रश्न करना आरम्भ किया तो सङ्गीतकारने पीछे हटनेका निर्णय लिया । उल्लेखनीय है कि इस प्रकारके प्रकरणोंको ‘द क्विंट’द्वारा सदैव ही बढा चढाकर प्रस्तुत किया जाता है ।
क्या किसी मुसलमान परिवारके विवाह समारोहपर यह सङ्गीतकार भजन बजानेका साहस कर सकता है ? उत्तर स्पष्ट है ‘नहीं’; परन्तु हिन्दुओंके विवाहमें उस संगीतकारने ‘सूफी’के नामपर इस्लामी गीत गवाया । उसे मना करनेवाले जिस व्यक्तिने साहसका परिचय दिया और उस संगीतकारकी मूर्खताका उसे आभास कराया, वह अभिनन्दनका पात्र है । ‘द क्विंट’द्वारा समाचार प्रकाशित करनेका एकमात्र उद्देश्य हिन्दू युवाओंमें अपने धर्मके प्रति ही घृणा उत्पन्न करना है । ऐसे समाचार ‘पोर्टल’पर अब पूर्ण प्रतिबन्ध लगाना अनिवार्य हो गया है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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