शिवलिंग मिलनेके पश्चात मुसलमान महिलाओंने की पूजा, ज्ञानवापी हिन्दुओंको सौंपनेका किया आग्रह


१७ मई, २०२२
            वाराणसीके ज्ञानवापी विवादित ढांचेके भीतर शिवलिंग एवं हिन्दू मन्दिरके साक्ष्य मिलनेके पश्चात मुसलमान महिलाओंने भी प्रसन्नता व्यक्तकी और कहा कि अब इस स्थानको हिन्दू भाईयोंको प्रदान कर देना चाहिए । ज्ञानवापीमें सर्वेक्षणका कार्य समाप्त हो गया है और परिसरमें शिवलिंग मिलनेकी बात उजागर होनेपर ‘मुस्लिम महिला फाउंडेशन’की सदस्य नजमा परवीनने कहा कि काशीमें भगवान शिवका मिलना भी अपने आपमें बहुत बडा साक्ष्य है कि काशी बाबा विश्वनाथकी नगरी है । उन्होंने कहा कि इस अवसरपर हिन्दू महिलाओंके साथ मिलकर मुसलमान महिलाओंने भी ढोल नगाडे बजाकर शिव ताण्डव स्तोत्रका पाठ किया है । इसीके साथ परवीनने मुसलमानोंसे विनतीकी है कि इस स्थानको रिक्त कर दिया जाए और हिन्दू भाइयोंको सौंप दिया जाए । उनका कहना है कि प्रत्येक स्थानपर अधिकार ‘जमाना’ और सम्पत्ति ‘हडपना’ अनुचित है; क्योंकि इस्लाममें कहा गया है कि वह भूमि और आकाश अपना होना चाहिए, जहां ‘नमाज’ पढी जाती हो । परवीनने कट्टरपन्थियोंको भी सतर्क किया कि उन्हें कठोर सन्देश देनेकी आवश्यकता नहीं है । उनके अनुसार, अब लोग जागरूक हो चुके हैं एवं हिन्दू-मुसलमानके नामपर किसीको उकसाया नहीं जा सकता । वहीं माता शृंगार गौरीमें प्रतिदिन पूजाकी मांगको लेकर याचिका प्रविष्ट करनेवाली ५ महिलाओंमें से एक सीता साहूने कहा है कि वह अन्तिम सांसतक यह लडाई लडती रहेंगी । उन्होंने बताया कि माता शृंगार गौरी मन्दिरमें १ दिन ही हिन्दुओंको पूजा करनेका अधिकार मिलता है और वह भी मन्दिरमें नहीं; अपितु मन्दिरकी चौखटपर । उन्होंने बताया मैंने पढा और सुना है कि परिसरमें देवी-देवताओंके विग्रह उपस्थित हैं । इसके अतिरिक्त नन्दी बाबाको ‘मस्जिद’की ओर मुख करके विराजमान देखती थी तो अचम्भित होती थी । उन्होंने यह भी बताया कि ज्ञानवापी परिसरका सत्य जाननेके लिए उन्होंने अधिवक्ता हरिशंकर जैन व विश्व वैदिक सनातन संघके प्रमुख जितेंद्र सिंह बिसेनकी अगुवाईमें इस लडाईको आरम्भ किया है ।
        मुसलमान महिलाओंने शिवलिंगके मिलनेपर प्रसन्नता व्यक्त तो की है; परन्तु सभी मुसलमानोंके मनमें ऐसे प्रसन्नता भाव होना असम्भव है । सभी पन्थके अनुयायी यदि इतिहासको जाननेका प्रयास करेंगे तो उन्हें अवश्य ही पता चलेगा कि प्रत्येक भारतवासीका मूल धर्म सनातन धर्म ही था, जो चिरकालसे है वह अनन्ततक रहेगा । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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