बंगाल ‘पुलिस भर्ती बोर्ड’की परीक्षामें ‘हिजाब’ पहने एक सहस्र मुसलमान लडकियोंका आवेदन हुआ निरस्त, प्रकरण अब उच्च न्यायालयमें


२६ नवम्बर, २०२१
              बंगाल ‘पुलिस भर्ती बोर्ड’की ओरसे ‘कॉन्स्टेबल’ व महिला ‘कॉन्स्टेबल’के पदों हेतु आवेदन आमन्त्रित किए गए थे, जिसमें एक सहस्रसे अधिक मुसलमान लडकियोंने आवेदन-पत्र भरते समय ‘हिजाब’ पहनकर अपना छायाचित्र साझा किया था । इसी कारण उनके आवेदनोंको निरस्त कर दिया गया था । अब विवाद बढनेके पश्चात प्रकरण कोलकाता उच्च न्यायालयमें है । समाचारके अनुसार, कोलकाता उच्च न्यायालयके न्यायाधीश अरिंदम मुखर्जीने अन्तरिम निर्णय सुनाते हुए कहा है कि ‘भर्ती’का भविष्य अब इस प्रकरणके निर्णयपर निर्भर करेगा । वहीं इसके पश्चात अपनी विजयको दर्शाते हुए याचिकाकर्ता तूहीना खातूनने आदेशको अपनी ‘आशाओंकी विजय’ बताया । ‘क्लेरियन इंडिया’से उक्त युवतीने अपना वक्तव्य साझा करते हुए कहा कि हम बहुत समयसे इस परीक्षाकी पूर्वसिद्धता कर रहे थे; परन्तु इस निर्णयद्वारा हमें अवसरसे वञ्चित कर दिया गया, अब न्यायालयने हमारी बात सुनी है और हमें आशा है कि हमें न्याय मिलेगा । वहीं मुसलमान महिलाओंके पक्षमें लड रहे अधिवक्ता फिरदौस समीमने कहा, “पुलिस बोर्डद्वारा दी गई अधिसूचना, संवैधानिक प्रावधानोंके विरुद्ध है ।” उल्लेखनीय है कि ‘पुलिस’ ‘भर्ती’की ओरसे प्रारम्भिक परीक्षा आयोजित करने हेतु, ६ सितम्बरको परीक्षाके प्रवेशपत्र प्रकाशित किए गए थे; परन्तु कुछ कारणोंसे तीस सहस्रसे अधिक छात्र परीक्षा देनेसे वञ्चित रह गए । मुसलमान आवेदकोंका कहना है कि ‘हिजाब’ पहनना राज्यमें मुसलमान समुदायकी आस्था और उनकी प्रथाओंका भाग है । वहीं ‘बोर्ड’द्वारा उसकी ‘गाइडलाइंस’में स्पष्ट लिखा था कि आवेदकको सूचित किया गया था कि छायाचित्र व हस्ताक्षरके स्थानपर अन्य किसी वस्तुका छायाचित्र साझा न करे ! मुखको ढककर साझा किए गए छायाचित्रको स्वीकार नहीं किया जाएगा ।
       जो महिला आवेदक सेवामें आनेसे पूर्व ही अपनी आस्थाको, सेवाके नियमोंसे ऊपर रख रहे हैं, वे सेवामें आनेके उपरान्त, निश्चित रूपसे निष्पक्षतासे कर्तव्य निर्वहन नहीं करेंगे; अतः ऐसे सभी आवेदकोंको पुलिस सेवासे, आजीवन प्रतिबन्धित किया जाना चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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