शिवकी बारातपर किलेके द्वारको पुतवानेपर धर्मान्धोंका हंगामा, पथरावमें एक चोटिल !


मार्च ४, २०१९


किलेके द्वारको पुतवानेकी बातपर नगरमें हंगामा हो गया । द्वारकी पुताईके विरुद्घ पुलिसमें परिवाद करनेवालेको बन्दी बनानेकी मांग लेकर भाजपा व हिंदू संगठनोंने कोतवालीमें हंगामा कर दिया । कोतवालीके पश्चात जब भाजपा नेता किला स्थित शिव मन्दिर जा रहे थे, इस मध्य किलेके द्वारपर उनपर पथराव हो गया । इसके पश्चात स्थिति विकट हो गई । पथरावमें एक युवक चोटिल हो गया ।

सोमवार, ४ मार्चको महाशिवरात्रिपर शिव विवाहका आयोजन किया जा रहा था । इसके लिए किला स्थित सोनेश्वर महादेव मंदिरपर शिव बारात जानी थी । इसीके लिए किलेके द्वारको पुतवाकर उसपर भगवान शिवके बारातियोंके स्वागतके लिए वंदन, अभिनन्दन लिखवा दिया । बताया गया है कि, द्वारकी पुताईको पुरातत्व धरोहरसे छेडछाड बताकर इसकी परिवाद ‘एसडीपीआई’के जिला अध्यक्ष नजम इकबालने कोतवालीमें कर दी । इसके पश्चात स्थिति विकट हो गई । भाजपाके जिला अध्यक्ष डॉ. गोपाल आचार्य, महामन्त्री रामलखन हिरनीखेडाके साथ विश्व हिन्दू परिषद, बजरंग दलके कार्यकर्ताओंने नजम इकबालको बन्दी बनानेके लिए कोतवालीमें प्रदर्शन कर दिया । लगभग एक घंटेतक कोतवालीमें हंगामा चलता रहा । इसके पश्चात आयोजक, भाजपा नेता व हिंदू संगठनोंके सदस्य कोतवालीसे किलेकी ओर भगवान शिवके जयकारोंके साथ चल दिए । किलेके द्वारपर पहुंचते ही उनपर पत्थर बरसना आरम्भ हो गए । पथरावके पश्चात तनाव बढ गया । भाजपा व हिन्दू संगठनोंके सदस्योंने पुलिसके विरुद्घ उद्घोष किए । पथरावमें बाथम मोहल्ला निवासी मुकेश शिवहरे चोटिल हो गया, जिसकी परिवादपर पुलिसने प्राथमिकी प्रविष्ट कर ली; परन्तु मीडियाको यह नहीं बताया गया कि पथरावकी प्राथमिकीमें किन-किनको दोषी बनाया गया है ?

नजम इकबालके अतिरिक्त इंसाफ कुरैशी व कुछ अन्यपर प्राथमिकी व बन्दी बनानेकी मांगको लेकर प्रदर्शन कर रहे लोगोंने कहा कि प्राथमिकी व दोषियोंको बन्दी नहीं बनाया तो शिवरात्रि नहीं मनाएंगें । भाजपा नेता रामलखन नापाखेडलीने कहा कि, इससे लोगोंकी भावनाएं आहत हुई हैं, यदि पुलिस प्रशासन तत्काल दोषियोंपर कार्यवाही नहीं करता तो, विरोध प्रदर्शन और बढेगा ।

 

“धर्मान्धोंको अब हिन्दुस्तानमें हिन्दुओंके त्यौहारोंसे आपत्ति है ! क्या कभी किसी भी हिन्दूने मुहर्रमपर ‘हाय हुसैन’ करनेसे रोका है ? क्या कभी बकरीदपर होनेवाले जीवोंके संहार, जोकि रोका जाना चाहिए था, उसे भी नहीं रोका है; परन्तु अब धर्मान्धोंको शिवकी बारातसे कठिनाई होने लगी है और इतनी कठिनाई कि पत्थरोंसे मारा जा रहा है ! इससे पूर्व हमें स्वयंको हिन्दू कहनेसे भी भय लगने लगे कि कही धर्मान्ध पत्थर न फेंक दें, उससे पूर्व सभी हिन्दुओंका जागृत होना आवश्यक है ! – सम्पादक , वैदिक उपासना पीठ

 

स्रोत : नई दुनिया



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