मात्र सात दशकोंमें इस देशमें नैतिकताका इतना पतन हुआ है कि आज दूध, फल, शाक (तरकारी) जैसी अति आवश्यक वस्तुएं भी शुद्ध नहीं मिलती हैं, प्रत्येक वस्तुमें मिलावट और प्रत्येक क्षेत्रमें भ्रष्टाचार इस देशकी अब नियति बन गई है ! ऐसे निधर्मी लोकतन्त्रका परित्याग कर हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना करना अपरिहार्य हो गया है ।
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