अक्तूबर ११, २०१८
केरल उच्च न्यायालयने गुरुवारको अखिल भारतीय हिन्दू महासभाकी उस जनहित याचिकाको नकार दिया, जिसमें उसने मुस्लिम महिलाओंको नमाज पढनेके लिए मस्जिदोंमें प्रवेश दिए जानेकी मांग की थी । मुख्य न्यायाधीश ऋषिकेश रॉय और जस्टिस एके जयशंकरन नांबियारकी खण्डपीठने याचिका खारिज करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता न ही पीडित पक्ष है और न ही उसके हित प्रभावित हुए हैं । याचिकामें महासभाने सबरीमाला प्रकरणमें उच्चतम न्यायालयके निर्णयका सन्दर्भ दिया था, जिसमें शीर्ष न्यायालयने सभी आयुकी महिलाओंको प्रवेशकी अनुमति प्रदान कर दी है ।
याचिकामें कहा गया कि महिलाओंको मस्जिदोंके मुख्य कक्षमें प्रवेश करने और नमाज पढनेकी अनुमति नहीं है । यह उनके साथ भेदभाव है और संविधानके अनुच्छेद १४ और २१ का उल्लंघन है । यहां तक कि मक्कामें भी महिलाओंको प्रवेशकी अनुमति है । सबरीमाला प्रकरणमें उच्चतम न्यायालयके निर्णयसे प्रेरित होकर केरलकी मुस्लिम महिलाओंके अधिकारके लिए कार्य करने वाले संगठन ‘एनआइएसए’ने उच्चतम न्यायालयमें याचिका प्रविष्ट करनेका निर्णय किया है । इसमें देशभरकी मस्जिदोंमें महिलाओंको प्रवेश देने और नमाज पढनेकी अनुमति दिए जानेकी मांग की जाएगी । इसके अलावा संगठन महिलाओंको ‘इमाम’ नियुक्त किए जानेके अधिकारकी भी पैरवी करेगा ।
“पूर्वकालमें न्याय करने वालोंके निर्णय शास्त्र आधारित होते थे । शास्त्रका ज्ञान न होने एवं देवत्वका ह्रास होनेसे आज स्थिति इतनी गम्भीर है, इसीसे गुरु व गुरुकुलका महत्व ज्ञात होता है !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : दैनिक जागरण
Leave a Reply