‘चर्च’में अनुसूचित जातिकी (SC) अवयस्क लडकियोंका ‘पादरी’ने किया यौन शोषण, बनाया गया बन्दी, ‘NCPCR’ के निर्देशपर आंध्र प्रदेश ‘पुलिस’ने की कार्यवाही


१६ नवम्बर, २०२१
 
      आंध्र प्रदेशके जनपद कुरनूलमें चट्टीवेदु ग्राम चगल्लामारी मण्डलके ‘पादरी’ उप्पलपति रवींद्र प्रसन्ना कुमारको ‘चर्च’में दो अवयस्क अनुसूचित जातिकी लडकियोंका यौन उत्पीडन करनेके आरोपमें बन्दी बनाया गया है । यह घटना ६ अक्टूबर की है; परन्तु ‘पुलिस’ने १२ नवम्बरको राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोगके (एनसीपीसीआरके) हस्तक्षेपके पश्चात, इस प्रकरणमें परिवाद (शिकायत) प्रविष्ट किया था । कुरनूल ‘पुलिस’ने ‘पादरी’के विरुद्ध ‘पोक्सो’ अधिनियमके अन्तर्गत प्रकरण प्रविष्ट किया है ।
      इस प्रकरणमें दलित शोधकर्ता प्रेरणा तिरुवैपतिने बताया कि उन्होंने ‘एनसीपीसीआर’से सम्पर्क किया था; क्योंकि ‘पुलिस’ प्रकरण प्रविष्ट नहीं कर रही थी और कथित रूपसे प्रकरणको न्यायालयके बाहर निपटानेका प्रयास कर रही थी ।
      प्रेरणाको १२ नवम्बरको इस घटनाके विषयमें तब पता चला, जब उन्हें लडकियोंका तेलुगुमें एक दृश्यपट मिला । वे इस दृश्यपटमें अपनी आपबीती बता रही थीं । इसका अनुवाद कराने और प्रकरणके विषयमें सभी जानकारी एकत्र करनेके पश्चात, प्रेरणाने ‘ईमेल’के माध्यमसे ‘एनसीपीसीआर’से सम्पर्क किया । ‘एनसीपीसीआर’ने १२ नवम्बरको ही प्रकरणपर संज्ञान लिया और कुरनूल ‘पुलिस’ने ‘पादरी’को त्वरित बन्दी बनानेके निर्देश दिए । कुरनूल ‘पुलिस’ने पादरीको १२ नवम्बर और १३ नवम्बरकी रात्रि लगभग १.३० बजे सेट्टीवेदु ‘बस स्टैंड’के निकट, उसके आवाससे बन्दी बनाया ।
    
 
      आंध्र प्रदेश ‘पुलिस’की भूमिका समूचे प्रकरणमें एक प्रश्नचिह्न उत्पन्न करती है ? कथित रूपसे प्रकरणको न्यायालयके बाहर निपटानेकाका प्रयास करती ‘पुलिस’, यह स्पष्ट रूपसे बता रही है कि वे ईसाई मिशिनरियोंके साथ है; अत: अपनी बहन-बेटियोंकी रक्षाके लिए, अब हिन्दुओंको धर्म शिक्षण देना कितना अनिवार्य हो गया है ? यह उपर्युक्त प्रकरणसे स्पष्ट होता है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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