चलचित्रमें हम देखते हैं कि एक अभिनेता कभी किसी अभिनेत्रीका पति या प्रेमी बनता है तो कभी उसका भाई; किन्तु हमें आश्चार्य नहीं होता है; क्योंकि वह यथार्थ नहीं होता ! कभी-कभी तो चलचित्रमें किसी अभिनेताकी मृत्यु या दुःखका दृश्य देखकर कुछ भावनाप्रधान लोग रोने भी लगते हैं; किन्तु खरे अर्थोंमें न तो ऐसे नटको कोई दुख होता है और न ही उनकी मृत्यु हुई होती है, यह तो मात्र कल्पना होती है !
आजके ये राजनेता भी ऐसे ही करते हैं, वे भारतकी जनताको ये मूर्ख बनाते हैं ! आज यदि वे किसी नेताको अपशब्द दे रहे हों और चुनाव पश्चात या कुछ वर्षों पश्चात ‘गलबैयां’ डालकर एक-दूसरेके सुरमें सुर मिलाएं तो आप आश्चार्यचकित या भ्रमित न हों, समझ लें, आपको कोई दूसरा चलचित्र देख रहे हैं ! ये नेतागण वास्तविक जीवनमें उच्च कोटिके अभिनेता होते हैं, ऐसा आप समझ सकते हैं, जैसे चलचित्र जगतके अभिनेताका कार्य लोगोंको अपने अभिनयसे बांधकर धन अर्जित करना होता है, वैसे ही इन अवसरवादी नेताओंका मुख्य कार्य इस देशकी जनताकी भावनाओंके साथ खिलवाडकर, सत्तासीन होना होता है ! ऐसे निधर्मी लोकतंत्रका सर्वनाश जितना शीघ्र हो उतना ही अच्छा होगा !
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