जनवरी ४, २०१९
देशमें जहां एक ओर मद्यपर प्रतिबन्ध लगानेका प्रयास किया जा रहा है तो दूसरी ओर राजस्थानमें मद्य विक्रयको बढावा देनेके लिए नूतन नीतियां सामने आई हैं । इसके अनुसार यदि मद्य विक्रय अल्प होता है तो दण्डका प्रावधान भी किया गया है ।
राज्यकी नूतन आबकारी नीतिमें मद्य विक्रयको बढावा देनेके लिए प्रावधान किया गया है । राजस्थानकी ‘आबकारी एवं मद्य-संयम नीति २०१९-२०’में मद्य विक्रयको बढावा देनेपर अधिक ध्यान दिया गया है । इसमें ठेकेदारोंपर अर्थदण्ड लगाए जानेकी बात कही गई है । ठेकेदारोंको प्रत्येक वर्ष गत वर्षकी तुलनामें १० प्रतिशतसे अधिक मद्य विक्रय करनी होगी ! यदि कोई ऐसा नहीं कर पाता है तो उसपर प्रत्येक तीन माहमें अर्थदण्ड लगेगा ।
दण्डकी राशिको भी बढाकर दो गुणा कर दिया गया है ! नूतन नीतिके अनुसार अंग्रेजी मद्यपर ३० रुपए प्रति बल्क लीटर और बीयरपर २० रुपए प्रति बल्क लीटर अर्थदण्ड लगेगा ।
“एक ओर शासकगण बडे-बडे विज्ञापनोंपर स्वास्थ्यको लेकर व्यय करते हैं, नामके लिए जागरूकता अभियान चलाते हैं तो दूसरी ओर मद्य विक्रयको प्रोत्साहन देते हैं, इससे ही उनकी बुद्धिमताका बोध होता है । ऐसा प्रतीत होता है कि देशको नर्कमें ले जानेका उत्तरदायित्व शासकवर्गोंके हाथमें ही है ! अन्यथा क्या प्रशासनको ज्ञात नहीं है कि इससे युवा पीढीका सत्यानाश हो रहा है । घर-घरमें झगडे व अवसाद बढ रहे हैं और मादक व अवसादग्रस्त युवा क्या राष्ट्रनिर्माण करेंगें, वे स्वयंको ही सम्भाल पाए, वही काफी है । इसका जीवन्त उदाहरण पंजाब है । मादकताने वहां क्षात्रतेजको समाप्त कर दिया है; परन्तु शासकवर्गोंका ध्यान इस ओर नहीं जाता है । अब इस स्थितिको परिवर्तित व पुनः एक सुसंस्कृत समाजके निर्माणके लिए हिन्दू राष्ट्रकी आवश्यकता है ।”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : फर्स्टपोस्ट
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