जुलाई २७, २०१८
‘राष्ट्रीय हरित अधिकरण’ने (एनजीटी) शुक्रवारको गंगा नदीकी स्थितिपर विरोध दिखाते हुए कहा कि हरिद्वारसे उत्तर प्रदेशके उन्नावके मध्य गंगाका जल पीने और स्नान योग्य नहीं है ! ‘एनजीटी’ने कहा कि लोग श्रद्धापूर्वक नदीका जल पीते हैं और इसमें स्नान करते हैं; लेकिन उन्हें नहीं ज्ञात कि इसका उनके स्वास्थ्यपर बुरा प्रभाव पड सकता है ।
‘एनजीटी’ने कहा, ‘लोग श्रद्धा और सम्मानसे गंगाका जल पीते हैं और इसमें स्नान करते हैं । उन्हें नहीं ज्ञात कि यह उनके स्वास्थ्यके लिए हानिकारक हो सकता है । यदि धुम्रदण्डिकाके (सिगरेट) ‘पैकेटों’पर यह चेतावनी लिखी हो सकती है कि यह ‘स्वास्थ्यके लिए घातक’ है, तो लोगोंको (नदीके जलके) प्रतिकूल प्रभावोंके बारे में जानकारी क्यों नहीं दी जाए ?’
‘लोगोंको जलके बारेमें जानकारी दी जानी चाहिए’
‘एनजीटी’ प्रमुख ए के गोयलकी अध्यक्षता वाली पीठने कहा, ‘हमारा दृष्टिकोण है कि महान गंगाके प्रति अपार श्रद्धाको देखते हुए, लोग यह जाने बिना इसका जल पीते हैं और इसमें स्नान करते हैं कि जल प्रयोगके योग्य नहीं है ! गंगाजलका प्रयोग करने वाले लोगोंके जीवन जीनेके अधिकारको स्वीकार करना बहुत आवश्यक है और उन्हें जलके बारेमें सूचना दी जानी चाहिए ।’
‘एनजीटी’ने ‘राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन’को सौ किलोमीटरके अन्तरालपर लिखित सूचनाके पट्ट लगानेका निर्देश दिया ताकि यह सूचना दी जाए कि जल पीने या स्नान योग्य है या नहीं ?
‘एनजीटी’ने ‘गंगा मिशन’ और ‘केन्द्रीय प्रदूषण नियन्त्रण मण्डल’को दो सप्ताहके भीतर अपने जालस्थलपर एक मानचित्र लगानेका निर्देश दिया, जिसमें बताया जा सके कि किन स्थानोंपर गंगाका जल स्नान और पीने योग्य है ।
स्रोत : जी न्यूज
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