‘मस्जिदों’से ध्वनिप्रक्षेपक नहीं हटाए तो हम ध्वनिप्रक्षेपकोंपर भजन गाएंगे
६ अप्रैल, २०२२
ध्वनिप्रदूषणपर अंकुश लगानेके लिए उच्चतम न्यायालयके आदेश अनुसार, ‘मस्जिदों’पर ध्वनिप्रक्षेपक लगानेपर प्रतिबन्ध होना चाहिए । ‘मस्जिद’ प्रबन्धकोंद्वारा विद्यालयों, चिकित्सालयोंमें भी उच्चतम न्यायालयके इस आदेशका उल्लङ्घन किया जाता है ।
कर्नाटकके बेलगामके ‘तहसीलदार’से ‘मस्जिद’में प्रातः ५ बजे ध्वनिप्रक्षेपकद्वारा कोलाहल न किए जानेकी मांग की गई है । न्यायालयके आदेशके पश्चात भी ‘ध्वनि प्रदूषण बोर्ड’ने आरोपियों विरुद्ध कोई कार्यवाही नहीं की है । इससे क्रोधित श्रीराम सेनाके अध्यक्ष प्रमोद मुतालिकने राज्य शासनसे कहा है कि हम भी प्रातः ध्वनिप्रक्षेपकपर भजन लगाएंगे । इससे पूर्वभी ‘मस्जिद’ प्रबन्धनको इस रोकसे अवगत कराया जा चुका है ।
बजरंग दलके सदस्य भरत शेट्टीके अनुसार, ‘मस्जिद’में ध्वनिप्रक्षेपक लगानेके विरुद्ध आन्दोलन बेंगलुरुके आंजनेय मन्दिरसे आरम्भ होगा व सर्व राज्यमें फैलेगा । कर्नाटकके मन्दिरोंमें प्रातः श्लोक पठन अथवा नामजप प्रारम्भ करनेका अभियान चलाया जाएगा ।
कर्नाटकके राज्यमन्त्री के. एस. ईश्वरप्पाने कहा कि रोगी व विद्यार्थियोंको होनेवाले कष्टके लिए इसका समाधान आवश्यक है । मुसलमानोंको विश्वासमें लेकर इसका समाधान निकालना सम्भव है । आन्दोलन व संघर्षसे दो समुदायोंके मध्य मतभेद बढेगा । इसके विपरीत मुख्यमन्त्री बसवराज बोम्मईने कहा कि निर्णय भले ही उच्चतम न्यायालयका हो; किन्तु इसे माननेके लिए सभीको बाध्य नहीं किया जा सकता । उन्होंने कहा कि ध्वनिप्रक्षेपक सम्बन्धित निर्णय केवल ‘अजान’ सम्बन्धी नहीं, वरन सभी आस्था स्थानों हेतु है ।
‘मस्जिदों’से प्रक्षेपित ध्वनि प्रदूषणसे सभी नागरिकोंको कष्ट होता है । मुसलमानोंको ऐसे आदेशोंकी अवहेलना करनेका कोई अधिकार नहीं । राज्यशासनको यह ध्यान देना चाहिए कि मन्दिरों, ‘मस्जिदों’ व ‘चर्चों’ जैसे सभी आस्था स्थलोंसे ध्वनिप्रदूषण न हो । समुदाय विशेषको छूट देना उचित नहीं है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
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