‘लाउड स्पीकर’पर ‘अजान’ देना मौलिक अधिकार नहीं, उच्च न्यायालयका निर्णय


८ मई, २०२२
           यह सर्वविदित है कि उत्तरप्रदेशमें योगी शासनने एक लाखसे अधिक ‘लाउड स्पीकर’ धार्मिक स्थलोंसे हटा दिए हैं व इससे अधिक सङ्ख्यामें धर्मिकस्थलोंपर लगे ‘लाउड स्पीकर’की ध्वनि न्यून कर दी है ।
              इससे क्रोधित बदायूंकी नूरी ‘मस्जिद’के मुतवल्ली इरफानने इस आदेशके विरुद्ध याचिका प्रस्तुत की थी, जिसे न्यायाधीश विवेक कुमार बिरला व न्यायाधीश विकास बधवारकी पीठने निरस्त कर दिया । इरफानने पुनः उच्चन्यायालयमें याचिका प्रस्तुत करते हुए कहा कि ‘लाउड स्पीकर’पर ‘अजान’ देनेसे रोकना उसके मौलिक अधिकारका हनन है । उच्चन्यायालयने अपना निर्णय देते हुए कहा कि ‘मस्जिद’पर ‘लाउड स्पीकर’का उपयोग मौलिक अधिकारका हनन नहीं है ।
       उच्च न्यायालयका निर्णय स्वागतयोग्य है । ये धर्मान्ध कभी ‘हिजाब’ तो कभी ‘बुर्के’को, कभी ‘तीन तलाक’ तो कभी ‘हलाला’को और अब ‘लाउड स्पीकर’पर चिल्लानेको अपना मौलिक अधिकार बता रहे हैं । इनकी ऐसी कृतियोंपर बन्धन आवश्यक है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
साभार : https://www.hindujagruti.org


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