धर्मधारा


इस धर्मनिरपेक्ष देशमें मात्र मन्दिरोंका सरकारीकरण होता है, मस्जिदों और गिरिजाघरोंका नहीं ! भिन्न मन्दिरोंकी वर्षों पुरानी परम्पराओंको तोडनेका आदेश न्यायालय बार-बार देता है, चाहे इससे सौ कोटि हिन्दुओंकी धार्मिक भावनाएं क्यों न आहत हो; किन्तु यह ध्यान रहे आजका हिन्दू जाग रहा है, वह अपने ऊपर होनेवाले ये सर्व भेदभावपूर्ण आदेशोंको समझ रहा है ! अन्याय इतना न करें कि सामान्य जन विद्रोहपर उतर जाए और लोकतन्त्रकी सर्व व्यवस्थाको वह उध्वस्त कर दे ! हिन्दू बहुल देशमें हिन्दुओंकी धार्मिक भावनाओंको शासन और न्यायालयने बार-बार आहत किया है, यह सात दशकका इतिहास चीख-चीख कर कह रहा है ! हिन्दुओंकी धैर्यकी अधिक परीक्षा न ली जाए हम तो मात्र यही कह सकते हैं !
 इससे यह भी सिद्ध हो रहा है कि आज शीर्ष पदोंपर भी धर्मद्रोही या हिन्दू धर्मके विषयमें अनभिज्ञ लोग विराजमान हैं । हिन्दू राष्ट्रमें सभी शीर्ष पदोंपर धर्मके अधिकारी व्यक्ति ही नियुक्त किए जाएंगे; अतः हिन्दुओंकी धार्मिक भावनाओंका और धर्मका सम्मान किया जाएगा ।



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