मार्च २५, २०१९
देशके पूर्व रक्षामन्त्री मनोहर पर्रिकरके निधनके पश्चात उनका शव पणजीकी कला अकादमीमें अतिम दर्शनके लिए रखा गया था । बादमें इस बातपर विवाद हो गया कि कला विद्यापीठका शुद्धिकरण कराया गया है । अब इस बारेमें गोवाके मन्त्री गोविंद गौडेने स्पष्टीकरण दिया है कि कला विद्यापीठमें कोई शुद्धिकरण नहीं कराया गया, वरन केवल हवन कराया गया था ।
गौडेने कहा, “मुझे नहीं लगता कि इसमें कोई औपचारिक जांचकी आवयकता है । वहां (कला अकैडमी) केवल यज्ञ कराया गया था, शुद्धिकरण नहीं ।” कला और संस्कृति मंत्री गौडेने यह भी कहा कि विद्यापीठके अधिकारियोंने धार्मिक गतिविधियोंकी अनुमति ली थी, यद्यपि उन्हें यह नहीं बताया गया था कि किसप्रकारकी चीजें की जाएंगी ।
उन्होंने कहा, “मैं नहीं चाहता कि कला विद्यापीठमें धार्मिक गतिविधियां बंद कर दी जाएं; परन्तु इससे लोगोंकी भावनाएं भी जुडी हैं और उन्होंने यज्ञ किया । वहां काम करनेवाले कई लोग पुजारी भी हैं ।”
“इस प्रकरणपर विरोधसे बोध होता है कि किसप्रकार हिन्दुओंकी मानसिकताका अधोपतन हुआ है कि वे अब शुद्धिकरणका भी विरोध कर रहे हैं ! यह तो सरलसा विज्ञान है कि मृत देहसे रज-तम तरंगे प्रक्षेपित होती है, वातावरणमें सूक्ष्म जीवाणु उत्पन्न होते हैं और नकारात्मकताका संचार होता है, फिर चाहे वह कितने ही बडे नेताकी भी देह क्यों न हो । यज्ञ नकारात्मकता और प्रक्षेपित रज-तमको हटाकर सात्विकताका संचार करता है; अतः यह पूर्णतया योग्य शास्त्र है और इसका विरोध करनेवाले अवश्य ही बुद्धिहीन हैं !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : नभाटा
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