पदका दुरुपयोग करने वाले बदरीनाथ धाम के पुजारी !


जून २०१७ में मैं बदरीनाथ धाम गई थी । संध्या समयकी आरतीमें उपस्थित रहने हेतु हम सभीने (हम चार लोग थे) ३५० रुपए शुल्क देकर टिकिट ली और आरती देखने गर्भगृहमें पहुंचे । किन्तु मैंने देखा कि वहां इतनी भीड थी कि खडे रहनेका भी स्थान नहीं था । हमने एक पुजारीसे विनम्रतासे कहा, “भैया इतनी दूर आरती देखने आये हैं तो कमसे कम हमें भी भगवानजीकी आरतीकी झलक तो प्रत्यक्षमें दिखा दें”, उन्होंने बहुत ही उद्दंडतासे कहा, “टीवी स्क्रीनपर देखें ।” मुझे यह सुनकर बहुत आश्चर्य हुआ एक तो खडे होनेका भी स्थान नहीं था ऊपरसे वे कह रहे हैं कि आरती आप गर्भगृहमें लगे टीवीपर देखें ! मैंने उनसे कहा, “यह तो हम अपने घरसे भी देख सकते हैं !” तो उन्होंने कहा, “यहां गर्भगृहमें घुसने हेतु लोग एक-एक लाख रुपए देने हेतु तत्पर रहते हैं ! आपको यहां आनेका सौभाग्य मिला है, इसीमें सन्तुष्ट हो जाएं और आप कौन होती है यहांकी व्यवस्थापर प्रश्न उठानेवाली ?” उसके इस उद्दंड उत्तरको वहां अन्य पंडित सुनकर हंस रहे थे और आरती कर रहे थे ! इसपर मुझे क्रोध आया, मैंने कहा, “ एक भक्त हूं और भगवानने मंदिर आकर उनका दर्शन करना तो हमारा अधिकार है, आपलोग आरतीके नामपर पंक्तिमें खडे रखकर ३५० रुपए क्यों लेते हैं ? वहां लिख दें कि यह मात्र गर्भगृहमें जानेका शुल्क है, आरती प्रत्यक्षमें देखने हेतु मिलेगा यह आवश्यक नहीं !’ उस दम्भीको मेरा यह उत्तर अच्छा नहीं लगा और उसने व वहां उपस्थित अन्य पण्डितोंने मुझे गर्भगृहसे बाहर निकलनेका आदेश दे दिया क्योंकि उनके अनुसार मैं मंदिरकी शांति भंग कर रही थी और वे लोग भक्तोंके धनको लूटकर, मनमानीकर, मंदिरमें भगवानकी पूजा कर रहे थे ! मेरा यह लेख ऐसे सभी अहंकारी पण्डितोंको अवश्य पढायें और उन्हें बताएं कि धर्मके पदको पाकर अहंकार और लोभमें जो उसका दुरुपयोग करते हैं, उन्हें अगली योनि गलीकी कुत्तेका मिलती है और ऐसे अहंकारियोंके कारण उस स्थानकी सात्त्विकता भी नष्ट हो जाती है ! बदरीनाथ धामके पुरोहितोंको मेरी सत्य बात इतनी चुभ गई कि अगले दिवस हम चार लोगोंने प्रातः ११०००-११००० रुपए प्रातः कालीन पूजा और श्रृंगारमें उपस्थित होने हेतु भी अर्पण किया था, उन दुष्ट पण्डितोंको यह बतानेपर भी कि मैं अधिक देर खडी नहीं रह सकती हूं, उन्होंने हमारा नाम सबसे अन्तमें बुलाया और प्रातः भी वहां इतने भक्त थे कि तीन घंटे हमें किसीप्रकार खडे होकर सब पूजा देखनी पडी ! एक क्षणके लिए लगा कि मैं बेसुध होकर गिर जाउंगी; किन्तु किसीप्रकार प्रार्थना कर मैं तीन घंटे एक ही स्थितिमें खडी रह पाई !   हिन्दू राष्ट्रमें ऐसे सभी मंदिर और व्यवस्थापनका शुद्धिकरण करना होगा और ऐसे पदके मदमें अंधे पण्डितोंके नाकमें नकेल लगानी होगी ! इसमें दो मत नहीं कि ऐसे पण्डितोंके आनाचारके कारण ही उस धामसे बद्रीनारायण चले जायेंगे और वह स्थान थोडे समय पश्चात कालके गालमें समा जायेगा ! किन्तु बद्रीनारायण दूसरे बद्रीधाममें प्रकट होगा !     अहंकारीको जब पद मिल जाता है तो वह यह भूल जाता है कि पदका दुरुपयोग उसकी साधनाको और उस स्थानकी सात्त्विकता दोनोंको नष्ट कर सकती है ! मैं तो हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना हेतु वहां पूजा-अर्चना करने गई थी और धर्म हेतु कष्ट उठानेकी और अन्यायके विरुद्ध स्वर मुखरित करनेकी मेरी प्रवृत्ति बन चुकी है; किन्तु आजका अधिकांश हिन्दू मृतवत हो चुका है, ऐसे अनाचारोंके विरुद्ध वह कुछ नहीं बोलता है  । धर्मके क्षेत्रमें जो अनाचार व्याप्त हो चुका है, उसे देखकर हिन्दू राष्ट्रकी स्थापनाका मेरा संकल्प और भी पुष्ट हो जाता है !    यदि सम्भव हो यह लेख बदरीनाथ धामके प्रशासनिक अधिकारी और पण्डोंको कोई अवश्य पढाये और आनेवाले आपातकालमें जब सभी ओर प्रलय रुपी ताण्डव होगा तो इन दम्भी पण्डितों और मंदिरोंपर कुंडली मारकर बैठकर अधिकारीगणोंको एवं भक्तोंके मनोभावके साथ खिलवाड करनेवाले लोगोंको ध्यानमें आएगा कि इस प्रलय हेतु वे भी कितने उत्तरदाई हैं ! हिन्दू राष्ट्र आनेपर ऐसे सभी स्थानोंपर क्या व्यवस्था करनी होगी, यह ईश्वरने मुझे सिखाया, इस हेतु हमें उनके कृतज्ञ हैं । 



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