घरका वैद्य-पालक (भाग-२) 


तन्त्रिका-तन्त्रमें लाभ : ‘पोटेशियम’, ‘फोलेट’ और विभिन्न ‘एन्टीऑक्सिडेंट’  आदि पालकके कई घटक हैं, ये लोगोंको ‘न्यूरोलॉजिकल’ कष्टोंमें लाभ प्रदान करते हैं, जो इसे नियमित रूपसे उपभोग करते हैं । ‘न्यूरोलॉजी’ के अनुसार, उनकी ‘अल्जाइमर’ के रोगके कारण ‘फोलेट’ कम हो जाती है । इसलिए पालक उन लोगोंके लिए बहुत अच्छा स्रोत है, जो तन्त्रिका या संज्ञानात्मक गिरावटके उच्च आशंकावाले (जोखिमवाले) लोग हैं ।

रक्तचापमें : पालकमें ‘पोटेशियम’ की बहुत ही उच्च मात्रा और ‘सोडियम’ की मात्रा कम होती है । पालकमें खनिजकी यह संरचना उच्च रक्तचापवाले रोगियोंके लिए बहुत लाभदायक होती है; क्योंकि ‘पोटेशियम’ रक्तचाप कम करता है जबकि ‘सोडियम’ रक्तचाप बढाता है । पालकमें उपस्थित ‘फोलेट’ उच्च रक्तचापको कम करनेमें योगदान देता है और उचित रक्त प्रवाह बनाए रखनेके साथ-साथ रक्त वाहिकाओंको विश्राम देता है ।

मांसपेशियोंके लिए : पालकका एक घटक, कारक ‘C0-Q10’, जो एक ‘एंटीऑक्सिडेंट’ है, मांसपेशियोंको सशक्त करनेमें विशेष भूमिका निभाता है, विशेष रूपसे हृदयके सभी मांसपेशियोंमें, जो शरीरके सभी भागोंमें निरन्तर रक्त प्रवाहित करता है । ‘जर्नल ऑफ कार्डियोवास्कुलर नर्सिंग’के अनुसार, C0-Q10 का उपयोग कई हृदय रोगोंको रोकनेके लिए किया जा सकता है जैसे कि ‘हाइपरलिपिडामिया’, हृदयकी विफलता, उच्च रक्तचाप और ‘कोरोनरी’ हृदय रोग ।

अस्थियोंके रोगोंमें : पालक विटामिनका एक अच्छा स्रोत  है, जो अस्थि (हड्डी) ‘मैट्रिक्स’में ‘कैल्शियम’को बनाए रखनेका कार्य करता है, यह अस्थियोंके लिए एक खनिज है । इसके अतिरिक्त, ‘मैंगनीज’, ताम्बे, ‘मैग्नीशियम’, ‘जस्ता’ और ‘फॉस्फोरस’ जैसे अन्य खनिजोंसे भी  सशक्त अस्थियोंके निर्माणमें सहायता मिलती है ।



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