गैस्ट्रिक’ अल्सर : यह पाया गया है कि पालक और कुछ अन्य शाकोंमें भी पेटकी श्लेष्मा झिल्लीकी (Mucous membrane) रक्षा करनेकी क्षमता होती है, जिससे ‘गैस्ट्रिक अल्सर’को रोका जा सकता है । इसके अतिरिक्त, पालकमें पाया जानेवाला ‘ग्लाइकोग्लिसरोलिपिड्स’ (glycoglycerolipids), पाचनतन्त्रकी आन्तरिक शक्तिको बढाता है, जिससे शरीरके उस भागमें किसी भी प्रकारकी अवाञ्छित ‘सूजन’ नहीं आती है ।
हृदयको रखता है स्वस्थ : ‘एथ्रोस्क्लेरोसिस’ धमनियोंके कठोर होनेके कारण होता है । ‘लिटिन’ नामक एक वर्णक जो पालकमें पाया जाता है, ‘एथ्रोस्क्लेरोसिस’, हृदयाघात (दिलके दौरे) और ‘स्ट्रोक’ की घटनाओंको कम करता है । इस कारण पालकका ‘प्रोटीन’ रक्त वाहिकाओंमें ‘कोलेस्ट्रॉल’ और अन्य जमी हुई वसाको कम करता है ।
भ्रूण विकास : अपने नए तन्त्रिकातन्त्रके समुचित विकास और बढते भ्रूणके लिए पालकमें पाए जानेवाले ‘फोलेट’की आवश्यकता होती है । ‘फोलेट’की कमीके कारण फांक तालू या ‘स्पाइना बिफिडा’ (Cleft palate or spina bifida) जैसे दोष हो सकते हैं । पालकमें निहित ‘विटामिन’को गर्भवती मांद्वारा उच्च मात्रामें खानेका सुझाव दिया जाता है । बच्चेके फेफडोंके विकासके लिए ‘विटामिन ए’की आवश्यकता होती है और इसे स्तनपानके मध्य स्थानान्तरित किया जा सकता है; इसलिए भोजनमें पालक खाना बच्चेके जन्मके पश्चात भी जारी रखना चाहिए ।
शोथ (सूजन) कम करता है : पालकमें पाए गए कई यौगिक (compounds), वस्तुतः बहुत अधिक हैं । जब शरीरमें ‘सूजन’को कम करनेकी बात आती है, तो उन्हें ‘मेथिलैनेडीयॉक्सी’ (Methilanadioxie), ‘फ्लैवनोल’ (flavonol), ‘क्यूरोनिड्स’ (glucuronids), नामक श्रेणीमें वर्गीकृत किया जाता है । यह न केवल हृदयकी रक्षा करता है; अपितु भयङ्कर ‘सूजन’ और कर्करोगको रोकनेमें भी सहायक है, यह गठिया जैसी स्थितियोंमें ‘सूजन’ और इससे सम्बन्धित वेदनाको न्यून करता है ।
Leave a Reply