आयुर्वेद अपनाएं, स्वस्थ रहें ! (भाग – १४)


पालक (पालक्या, Spinach) शीतऋतुमें उत्पन्न होता है तथा पालेको सहन कर सकता है;  किन्तु अधिक उष्णता नहीं सह सकता है । इसमें जो गुण पाए जाते हैं, वे सामान्यतः अन्य शाकमें (सब्जीमें) नहीं होते हैं । यही कारण है कि पालक स्वास्थ्यकी दृष्टिसे अत्यन्त उपयोगी, सर्वसुलभ एवं सस्ता है । यह भारतके प्रायः सभी प्रान्तोंमें बहुलतासे सहज ही मिल जाता है ।
*घटक – इसमें पाए जाने वाले तत्वोंमें मुख्य रूपसे ‘सोडियम’, ‘क्लोरीन’, ‘फास्फोरस’, लोहा, खनिज लवण, ‘प्रोटीन’, श्वेतसार, ‘विटामिन -ए एवं सी’ आदि उल्लेखनीय हैं । इन तत्वोंमें भी लोहा विशेष रूपसे पाया जाता है । इसके अतिरिक्त इसमें ‘विटामिन बी-१, बी-३’, ‘मैंगनीज’, ‘फोलेट’, तांबा, ‘पोटैशियम’ प्रचुर मात्रामें होते हैं ।
आइए, पालकके कुछ स्वास्थ्य लाभके विषयमें जानते हैं –
* रक्तकी अल्पता – पालकमें लौहतत्वकी मात्रा बहुत अधिक होती है और शरीर यह सरलतासे सोख भी लेता है; इसलिए पालक खानेसे ‘हीमोग्लोबिन’ बढता है ।
* गर्भवतीके लिए – गर्भवती महिलाओंमें प्रायः ‘फोलिक अम्ल’की न्यूनता (कमी) हो जाती है, इसे दूर करनेके लिए पालकका सेवन लाभदायक होता है । साथ ही, पालकमें पाया जानेवाला ‘कैल्शियम’ बढते बच्चों, बूढे व्यक्तियों और गर्भवती व स्तनपान करानेवाली महिलाओंके लिए बहुत लाभप्रद होता है ।
* नेत्रोंके लिए – पालक नेत्रोंके लिए अत्यधिक अच्छा होता है । इसके सेवनसे नेत्रोंकी ज्योति बढती है । ऐसे लोग,  जिन्हें रतौंधीका कष्ट हो और उन्‍हें हल्के प्रकाशमें स्पष्ट दिखाई नहीं देता, उनके लिए पालक एक प्रकारसे चमत्‍कारका कार्य करता है । ऐसे लोगोंको गाजर व टमाटरके रसमें समान मात्रामें पालकका रस मिलाकर लेना चाहिए ।
* पाचन तन्त्र – आधा गिलास कच्‍चे पालकका रस, प्रातः उठकर नियमित रूपसे पीनेसे कुछ ही दिवसमें कब्‍जकी समस्‍या दूर हो जाती है ।
इसके अतिरिक्त पालक गठियामें, शरीरको बलशाली बनानेमें, दांतोंको सशक्त रखने एवं बालोंके लिए भी लाभप्रद है ।
सेवन विधि – पालकको शाक (सब्जी) बनाकर, चटनी बनाकर, उबालकर या सूप बनाकर सेवन किया जाता है । पकानेके पश्चात भी इसके गुण नष्ट नहीं होते हैं । पालकके रससे आटा लगाकर चपाती या पूडी बना सकते हैं । इसे दालके साथ या किसी दूसरी शाकके साथ मिलाकर खानेसे पौष्टिकता मिलती है । पालकका रायता, पकौडे आदि भी बनाए जा सकते हैं ।
*सावधानियां :
१. पालकमें ‘ऑक्जेलिक एसिड’ प्रचूर मात्रामें होता है । इस तत्वमें खनिजके साथ चिपकनेकी प्रवृति होती है । यह ‘कैल्शियम’, ‘मेग्नेशियम’ आदि खनिजोंके साथ चिपक जाता है, जिसके कारण शरीर इन खनिजोंको अवशोषित नहीं कर पाता है । इस कारण शरीरकी सामान्य प्रक्रिया बाधित होकर खनिज लवणकी न्यूनता (कमी) हो सकती है; अतः बहुत अधिक मात्रामें पालकका उपयोग सही नहीं होता है ।
२. पालकमें ‘फाइबर’ अधिक मात्रामें होता है । इसमें कोई शंका नहीं कि ‘फाइबर’ शरीरके लिए आवश्यक होता है, परन्तु इनकी अधिक मात्रा पाचन तन्त्रपर भार भी बढाती है ।
३. पालकका सेवन इसके पत्तोंको अच्छेसे धोकर ही करना अच्छा है, क्योंकि आजकल रासायनिक उर्वरकोंका प्रयोग अत्यधिक होता है ।



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