‘मन्दिरकी दैनिक घटनाओंमें हस्तक्षेप नहीं कर सकता न्यायालय, भक्तकी याचिकापर बोला सर्वोच्च न्यायालय, ‘TTD’ समितिपर अनियमितताके आरोप


१६ नवम्बर, २०२१
 
      सर्वोच्च न्यायालयने मंगलवारको (१५ नवम्बर २०२१) तिरुमलाके तिरुपति बालाजी मन्दिर परिसरमें पूजा-अर्चनाकी विधि और अनियमितताओंके आरोपोंको लेकर प्रविष्ट याचिकापर सुनवाईसे मना कर दिया । सर्वोच्च न्यायालयने कहा कि न्यायालय, किसी मन्दिरकी दैनिक घटनाओंमें हस्तक्षेप नहीं कर सकते हैं । मुख्य न्यायाधीश एनवी रमनाकी अध्यक्षतावाली पीठने कहा कि संवैधानिक न्यायालय यह नहीं बता सकता कि किसी मन्दिरमें कैसे पूजा और अनुष्ठान किए जाएं ? कैसे नारियल तोडे जाएं या देवी-देवताको किस प्रकारसे माला पहनाई जाए ?
      वास्तवमें भगवान वेंकटेश्वर स्वामीके एक भक्त श्रीवरी दद्दने तिरुपति मन्दिरके पूजा-पाठमें अनियमितताका आरोप लगाया था । २९ सितम्बरकी सुनवाईमें सर्वोच्च न्यायालयने मन्दिरका प्रबन्धन करनेवाले तिरुमला तिरुपति देवस्थानमको (TTD को) एक सप्ताहके भीतर परिवादपर (शिकायतपर) उत्तर देनेको कहा था । इससे पूर्व आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालयने भी यह याचिका, यह कहते हुए निरस्त कर दी थी कि वह पूजा करनेकी पद्धतिमें हस्तक्षेप नहीं कर सकता है । उच्च न्यायालयने कहा था कि यह घटना देवस्थानमके अधिकार क्षेत्रमें आता है ।
   
 
       हिन्दुओंकी आस्थाका सम्मान करनेके लिए न्यायालय अभिनन्दनका पात्र है; परन्तु जब एक बुद्धिभ्रष्ट हिन्दू, अपने ही धर्म और आस्थाका परिहास करनेके लिए, न्यायालय पहुंच जाए, तो इससे समझमें आता है कि हिन्दू समझका किस प्रकार पतन हुआ है ! अब तो केवल हिन्दू राष्ट्रमें ही, भारत देशका उत्थान होना सम्भव प्रतीत होता है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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