अक्तूबर १५, २०१८
‘नेटफ्लिक्स’, ‘अमेजॉन प्राइम’ जैसे ऑनलाइन माध्यमोंपर दिखाई जाने वाली सामग्रीको विनयमित (रेगुलेट) करनेकी मांग उठी है । इस बारेमें दिल्ली उच्च न्यायालयमें एक जनहित याचिका प्रविष्ट की गई है । ‘जस्टिस फॉर राइट्स’ नामक एक सामाजिक संस्थाद्वारा (एनजीओद्वारा) प्रविष्ट याचिकामें दावा किया गया है कि विनयमितताकी कमीके कारण ये माध्यम ‘पूर्ण रूपसे अश्लील, धार्मिक रूपसे वर्जित और अनैतिक’ सामग्री दिखा रहे हैं !
अधिवक्ता एच.एस. होराके माध्यमसे प्रविष्ट इस याचिकामें यह भी आरोप लगाया गया है कि ऐसे ऑनलाइन माध्यमपर प्रस्तुत होने वाली सामग्रीमें भारतीय दण्ड संहिता (IPC), इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट, महिलाओंकी अभ्रद छवि प्रस्तुत करनेके बारेमें एक्ट जैसे कई प्रावधानोंका उल्लंघन किया जा रहा है ।
स्वयंसेवी संस्थाने न्यायालयसे अनुरोध किया है कि वह तत्काल इनसे वैधानिक रूपसे प्रतिबन्धित सामग्री हटवानेके लिए आदेश दे । इस प्रकरणपर न्यायालयने १४ नवम्बरसे सुनवाई करनेका निर्णय लिया है ।
“शिवत्वहीन विज्ञानका दुरुपयोग विद्यार्थियोंको नष्ट करने हेतु किया जा रहा है, जिससे वे क्षात्रहीन, बलहीन होकर केवल एक दासताका जीवन व्यतीत करें !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : आजतक
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