गंगा तटपर बने घाटोंमें, ‘अहिन्दुओंको प्रवेश नहीं’ दर्शानेवाले सूचनापट्ट, बिना किसी परिवादके ‘पुलिस’ने हटाए
०८ जनवरी, २०२२
वाराणसीमें अहिन्दुओंको गंगा घाटोंमें प्रवेश नहीं करनेकी चेतावनी देनेवाले हिन्दी भाषाके सूचनापट्ट समूचे नगरमें दिखाई दे रहे हैं । कहा जाता है कि इन्हें विश्व हिन्दू परिषद और बजरंग दलने लगाया था । इन सूचनापट्टोंपर इन दोनों संगठनोंके नाम लिखे हुए हैं । यद्यपि, इस सम्बन्धमें कोई परिवाद प्रविष्ट नहीं कराया गया है, तथापि ‘पुलिस’ने इन सभी सूचनापट्टोंको हटा दिया है । इनका श्रव्यदृश्य तीव्रतासे प्रसारित होनेके उपरान्त, ‘पुलिस’ प्रचारकोंको ढूंढ रही है ।
इन सूचनापट्टोंपर लिखा है, “अहिन्दुओंका प्रवेश वर्जित है । गंगा माता, काशी घाट तथा मन्दिर, सनातन धर्म, भारतीय संस्कृति, श्रद्धा और आस्थाके प्रतीक हैं । सनातन धर्ममें आस्था रखनेवालोंका यहां स्वागत है । यह स्थान कोई ‘पर्यटन स्थल’ नहीं है । यह एक चेतावनी है, अनुरोध नहीं ।”
बजरंगदलके काशी प्रबन्धक निखिल त्रिपाठी रुद्रने ‘पीटीआई’को बताया कि, अहिन्दू काशीके घाटोंकी पवित्रता नष्ट कर रहे हैं; इसलिए उन्हें चेतावनी दी गई है । सनातन धर्ममें आस्था न रखनेवालोंके लिए यह चेतावनी है । कुछ दिवस पूर्व घाटपर एक युवतीका मद्य पीते हुए चित्र देखा गया था । यहांके घाट और मन्दिर सनातन धर्मके प्रतीक हैं । यदि कोई व्यक्ति अपवित्रता करता दिखाई दिया, तो हम उसे पकडकर ‘पुलिस’को सौंप देंगे ।
जिस प्रकार विद्यालयों, कार्यालयों व प्रतिष्ठानोंको उत्तम रूपसे संचालित करने हेतु अनुशासनात्मक विधान होते हैं, उसी प्रकार हिन्दुओंके आस्थास्थलोंके विधानोंका बोधकर इनकी मर्यादाको सुनिश्चित करना प्रत्येक नागरिकका नैतिक कर्तव्य है; अतः पुलिसद्वारा हिन्दुओंके आस्थास्थलोंके विधानमें हस्तक्षेप करना अनुचित है । उत्तर प्रदेश शासन उक्त प्रकरणका त्वरित संज्ञान लेते हुए हिन्दू हितोंकी रक्षाके प्रति न्यायोचित कार्य करे ! – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
साभार : सनातन प्रभात
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