पूजन एवं ज्ञानका महापर्व वसन्त पंचमी


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अ. विद्याकी देवी, वाग्देवी मां सरस्वतीकी आराधनाका पर्व है वसन्त पंचमी

कलियुग वर्ष ५११८ के माघ शुक्ल पंचमीको (१ फरवरी २०१७) वसन्त पंचमी है, इस पर्वसे ही ‘वसन्त ऋतु’का आगमन होता है । वसन्त पंचमी वाग्देवी मां सरस्वतीकी आराधनाका पर्व है । ब्राह्मण-ग्रन्थोंके अनुसार वाग्देवी मां सरस्वती ब्रह्मस्वरूपा, कामधेनु तथा समस्त देवोंकी प्रतिनिधि हैं । ये ही विद्या, बुद्धि और ज्ञानकी देवी हैं । अमित तेजस्विनी व अनन्त गुणशालिनी देवी सरस्वतीकी पूजा-आराधनाके लिए माघमासकी पंचमी तिथि निर्धारित की गई है । वसन्त पंचमीको इनका आविर्भाव दिवस माना जाता है; अतः वागीश्वरी जयन्ती व श्रीपंचमी नामसे भी यह तिथि प्रसिद्ध है । वसन्त पंचमी, वसन्त ऋतुके प्रादुर्भावकी भी तिथि है अर्थात् इसी दिन ऋतुराज वसन्तका पृथ्वीपर प्रादुर्भाव हुआ था । साथ ही इसी दिन कामके देवता अनंगका भी आविर्भाव हुआ था अर्थात् इस दिन सम्पूर्ण प्रकृतिमें उल्लास व आनन्दकी सृष्टि हुई थी । वह मादक उल्लास व आनन्दकी अनुभूति अब भी ज्योंकी त्यों है और वसन्त पंचमीके दिन यह प्रस्फुटित होती है; अतः इस पर्वको हर्षोल्लासके पर्वके रूपमें भी मनाया जाता है ।

आ. ऋग्वेदमें सरस्वती देवीकी महिमाका वर्णन

ऋग्वेदके १०/१२५ सूक्तमें सरस्वती देवीके असीम प्रभाव व महिमाका वर्णन है । मां सरस्वती विद्या व ज्ञानकी अधिष्ठात्री हैं । जिनपर सरस्वती देवीकी कृपा होती है, वे अत्यन्त ही विद्वान व कुशाग्र बुद्धि होते हैं, वे ज्ञानी और विद्याके धनी होते हैं ।

इ. वसन्त पंचमीको किए जानेवाले शुभ कार्य

वसन्त पंचमीको सभी शुभ कार्योंके लिए अत्यन्त शुभ मुहूर्त माना गया है । मुख्यतः विद्यारम्भ, नवीन विद्या प्राप्ति एवं गृह प्रवेशके लिए वसन्त पंचमीको पुराणोंमें भी अत्यन्त श्रेयस्कर माना गया है ।

ई. वसन्त पंचमीका अत्यन्त शुभ मुहूर्त होनेके कारण

यह पर्व सामान्यतः माघ मासमें ही पडता है । माघ मासका भी धार्मिक एवं आध्यात्मिक दृष्टिसे विशेष महत्त्व है । इस माहमें पवित्र तीर्थोंमें स्नान करनेका विशेष महत्त्व बताया गया है, साथ ही इस समय सूर्यदेव भी उत्तरायण होते हैं ।

उ. वसन्त पंचमी मनानेके लाभ

वसन्त पंचमीके दिन सरस्वती पूजन और व्रत करनेसे वाणी मधुर होती है, स्मरण शक्ति तीव्र होती है, प्राणियोंको सौभाग्य प्राप्त होता है, विद्यामें कुशलता प्राप्त होती है । पति-पत्नी और प्रियजनका कभी वियोग नहीं होता है तथा दीर्घायु एवं नीरोगता प्राप्त होती है ।



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