रोटी तो आप सभी खाते ही होंगे ! तो क्या आप भी ‘पैकेट’वाले गेहूंका आटा क्रय करते हैं ?
यदि हां, तो बन्द कर दीजिए ये आटा क्रय करना और खाना । ये बहुत दिनोंका पीसा हुआ आटा होता है । इसमें कीडे या घुन न पड जाएं; इसलिए इसके निर्माताओंद्वारा इसमें ‘बेंजोइल पेरोक्साइड’ नामक एक घातक रसायन मिलाया जाता है । यदि यह नहीं मिलाया जाए तो कुछ ही दिनोंमें आटेमें स्वतः जाले लग जाएं और उसमें इल्ली भी पड जाए । यद्यपि इन आटा विक्रेताओंके द्वारा विपणन हेतु प्रेषित आटेका उपभोग सीमित अवधिमें नहीं होता है; इसलिए प्रायः सभी आटा विक्रेता ‘बेंजोइल पेरोक्साइड’की मिलावट करते ही हैं । इस ‘पैकेट’वाले आटेमें ‘ग्लूटेन’की मात्रा भी होती है और जैसे-जैसे यह ‘पैकेट’वाला आटा पुराना होता जाता है, इसमें ‘ग्लूटेन’की मात्रा और बढती जाती है, जो शरीरको हानि पहुंचाती है ।
तो क्या करें ?
गेहूं लेकर अपनी समीपकी आटा-चक्कीपर जाइए एवं स्वयं आटा पिसवाइए !
पिसवाते समय उस गेहूंमें कुछ अन्य मोटे पारम्परिक अनाज भी मिलवा लीजिये, जैसे ज्वार, मक्का, जौ, रागी, बाजरा, चना इत्यादि । आप चाहें तो उसमें २५० ग्रामसे लेकर आधा किलोतक मेथी दाने, २५० ग्राम अजवाइन इत्यादि भी मिलवा सकते हैं ।
उदाहरणस्वरूप आपने यदि १५ किलो गेहूं लिया, तो उपर्युक्त सभी अनाज अथवा दलहनकी एक-एक किलोकी मात्रा गेहूंमें मिलवा लीजिए ! सभी अनाज एवं दलहनको भलीभांति मिलवाकर उसे पिसवा लें ! यह जो आटा निकलेगा, यह अत्यधिक पोषक होगा । इसकी पौष्टिकता (Nutritious value) बहुत अधिक होगी ।
मात्र गेहूंके आटेसे आपको सभी पोषक तत्त्व नहीं मिलते हैं, जितने इन सभी अनाजों तथा दलहन मिश्रित आटेके उपयोगसे मिलते हैं । सामान्य आटेकी ८ रोटीके बराबर पोषक तत्त्व इस मिश्रित आटेकी १ रोटी देगी । इस आटेसे रोटी बहुत स्वादिष्ट भी बनेगी ।
हमलोगोंने अपने भोजनमें मोटे अनाजको लेना प्रायः समाप्त ही कर दिया है, जिससे आज हमारा शरीर असङ्ख्य रोगोंका घर बन गया है ।
इस आटेके क्या-क्या लाभ हैं ?
१. आपका पाचन बहुत ही अच्छा हो जाएगा । शरीरका प्रत्येक रोग पेटसे ही आरम्भ होता है ।
२. इस आटेकी रोटीसे आपका पेट स्वच्छ रहेगा, छोटी आंतसे लेकर बडी आंततक स्वच्छ रहेगी ।
३. जिनको मलबद्धता (कब्ज) अथवा वायुविकार (गैस) इत्यादिका रोग हो तो उन्हें इनमें विश्रान्ति मिलेगी ।
४. शिरःशूल (सिरदर्द) सिर भारी-भारी रहना, आलस्य,
शरीरमें स्फूर्ति न होना, मधुमेह, ‘कोलेस्ट्रॉल’, उच्च एवं निम्न रक्तचापसे लेकर असङ्ख्य रोगोंसे आपको छुटकारा मिलेगा ।
५. यकृत (लिवर) एवं आंतें पूर्णतः स्वच्छ रहेंगी, जिससे मलावरोध, अर्शरोग (बवासीर, piles) इत्यादि जीवनमें कभी नहीं होंगे ।
सत्तू
पूर्वकालमें लोग सत्तू खाते थे ।
जैसे आज हानिकारक ‘नूडल्स’ जैसे ‘मैगी’, यिप्पी, पतंजलि नूडल्स आदि हैं न ! ठीक उसी प्रकार पहले लोग अपने घरोंमें सत्तू रखते थे । यह भी बना-बनाया खाना (readymade food) है ।
आजके इन निरर्थक ‘नूडल्स’के (सिवइयांके) लिए २ मिनिटका समय और साथमें चूल्हा भी चाहिए; किन्तु अत्यधिक पोषक सत्तू हेतु कुछ नहीं चाहिए । कहीं भी हों, पानी डालो, गूंथ लो, घोलो और खा लो ।
ये सत्तू भी दाल, चना, जौ, गेहूं एवं अन्य मोटे अनाजोंसे ही बनता है । आज लोग इसे बडी ही हेय दृष्टिसे देखते हैं; किन्तु इन पदार्थोंके सेवनसे ही पूर्वकालमें लोग बलिष्ठ होते थे, उन्हें किसी चिकित्सक अथवा उपचारकी आवश्यकता नहीं पडती थी ।
आज जिधर देखें, असङ्ख्य चिकित्सालय हैं और उनमें भी पंक्तिमें असङ्ख्य लोग । इन ‘कुकुरमुत्ते’की भांति अनेकानेक चिकित्सालयों एवं चिकित्सकोंके उगनेके कारण ही आज सभी रोगी हैं ।
आप अपने दैनिक आहारमें, इस आलेखमें उल्लेखित विधिसे मिश्रित आटेका सेवन करके देखिए ! चिकित्सालयों एवं चिकित्सकोंका मुंह देखने हेतु तरस जाएंगे ।
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