प्रातःकाल बासी मुख न करें चाय पीनेकी चूक, स्वास्थ्यपर भारी पड सकती है आपकी यह अयोग्य कृति !
कुछ व्यक्ति ऐसे होते हैं, जिनकी प्रातःकाल चाय अथवा ‘कॉफी’की चुस्की लिए बिना नींद ही नहीं खुलती है । यदि आपको भी बासी मुख चाय अथवा ‘कॉफी’ पीनेका अभ्यास है तो यह आपके लिए भी कष्टकारी हो सकता है । भले ही अधिकांश व्यक्तियोंके लिए ये ‘कम्फर्ट ड्रिंक’ हो; किन्तु जागनेके पश्चात शीघ्र ही बासी मुख इन्हें पीना, शरीरको हानि पहुंचा सकता है ।
विशेषज्ञोंके अनुसार, जो व्यक्ति प्रातः उठकर सर्वप्रथम चाय अथवा ‘कॉफी’ पीते हैं, उन्हें इस तथ्यका ध्यान रखना चाहिए कि जब वे उठते हैं, तो उनका पेट ‘एसिडिक पीएच स्केल’पर होता है । चाय अम्लीय (एसिडिक) होती है । ऐसेमें जब बासी मुख चाय पीएंगे, तो इससे ‘एसिडिटी’ अथवा ‘हार्ट बर्न’की समस्या हो सकती है । इतना ही नहीं, इससे आपके शरीरकी ‘मेटाबॉलिक एक्टिविटीज’ भी गडबडा जाएंगी ।
तो आइए, यहां हम आपको बताते हैं कि प्रातः उठकर शीघ्र चाय अथवा ‘कॉफी’ क्यों नहीं पीनी चाहिए तथा इन्हें पीनेका सबसे अच्छा समय व रीति क्या है ?
बासी मुख चाय अथवा ‘कॉफी’ पीनेसे हानि :
चाय अथवा ‘कॉफी’की प्रकृति अम्लीय (एसिडिक) होती है, बासी मुख इनका सेवन करनेसे ‘एसिडिक बेसिक’ सन्तुलनपर दुष्प्रभाव पड सकता है, जिससे अनेक बार अम्लपित्तकी समस्या होती है ।
वास्तवमें, चायमें ‘थियोफिलाइन’ नामक एक यौगिक होता है, जो निर्जलीकरणके कारण है । प्रातः बासी मुख चाय अथवा ‘कॉफी’ पीनेके पश्चात सर्वप्रथम मुखके जीवाणु (बैक्टीरिया) शर्कराको (शुगरको) तोडते हैं, जिससे मुखके अम्लका (एसिडका) स्तर बढ जाता है । कुछ व्यक्तियोंको प्रातः दूधसे बनी चाय पीनेके पश्चात भी सूजनका अनुभव हो सकता है ।
चाय अथवा ‘कॉफी’ पीनेका सबसे उचित समय :
विशेषज्ञोंकी मानें, यदि चाय चाय अथवा ‘कॉफी’ पीना ही हो तो सबसे उचित समय खाना खानेके १-२ घण्टे पश्चात होता है । आप इसे प्रातः भी पी सकते हैं; किन्तु ध्यान रखें, बासी मुख कभी भी न पीएं । बासी मुख चाय पीना निर्जलीकरणका कारण बन सकता है । विशेषकर जब इसका सेवन ८-९ घण्टेकी नींदके पश्चात किया जाए, तब शरीरमें भोजन व पानीकी मात्रा नहीं होती । ऐसेमें निर्जलीकरण मांसपेशियोंमें ऐंठन उत्पन्न कर सकता है; इसलिए चायके संग ‘बिस्किट’, ‘टोस्ट’ इत्यादि लेना अपेक्षाकृत अच्छा है । सन्ध्याकाल चाय पीते समय भी हलका नाश्ता (स्नैक्स) लेना अच्छा विकल्प है ।
विशेषज्ञ कहते हैं कि सोनेसे पूर्व ‘कॉफी’ पीनेसे बचना चाहिए । इससे आपकी नींदका चक्र (स्लीप साइकिल) बाधित होता है तथा रात्रिमें कई बार नींद भी बाधित हो जाती है ।
प्रातः हेतु उचित स्वास्थ्यवर्धक विकल्प :
आवश्यक नहीं कि आपके दिनका आरम्भ चायकी चुस्कीके संग ही हो, आप प्रातः हेतु अधिक उचित विकल्प भी चुन सकते हैं । जागनेके पश्चात आप एक कप गरम नींबूके रसमें चुटकी भर ‘नमक’ व काली मिर्च मिलाकर पी सकते हैं । भार घटानेके लिए भी यह एक अपेक्षाकृत बहुत ही अच्छा विकल्प है तथा साथ ही यह आपके रोग प्रतिरोधक क्षमताको भी बढा देगा । प्रतिरक्षाको सुदृढ बनाने हेतु ‘ताजी’ गिलोयका रस एवं आंवलेका रस पीना भी अच्छा है ।
मेथीके बीज, सौंफ अथवा जीरा पानी : ‘सुबह’ चाय अथवा ‘कॉफी’के स्थानपर आप मेथीके बीज, सौंफ अथवा जीरेका पानी बनाकर पीएंगे, तो बहुत लाभ प्राप्त होगा ।
इस हेतु आप १ चम्मच मेथीके बीज अथवा १ चम्मच सौंफ अथवा १ चम्मच जीरा रातभर पानीमें भिगोकर रख सकते हैं । प्रातःकाल पानीको छान लें तथा थोडा गरम करके पी लें । यदि आपको प्रातः आलस्य आता है, आप अधिक कुछ नहीं करना चाहते, तो मात्र गुनगुने पानीमें आधा छोटा चम्मच अलसीका चूर्ण मिलाकर पी लें । यह अपेक्षाकृत एक बहुत ही अच्छा ‘एंटीऑक्सीडेंट’ है, जो आपके ‘मेटाबॉलिज्म’में सुधार करनेके लिए जाना जाता है ।
आपको अपनी प्रातःकी चाय अथवा ‘कॉफी’को पूर्णरूपेण त्यागनेकी आवश्यकता नहीं है; किन्तु इसे पीनेकी विधिमें ‘बदलाव’ अवश्य करना होगा । बासी मुख चाय कदापि न पीएं । एक कप चायका सेवन करनेसे पूर्व फल, अनाज अथवा कोई हलका नाश्ता (स्नैक) लेना अभ्यासमें डालें ।
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