सूरतकी शिवशक्ति ‘सोसाइटी’में खडी हो गई ‘मस्जिद’, होने लगी ‘नमाज’, कांग्रेस पार्षदने बताया ‘वक्फ बोर्ड’की सम्पत्ति


२५ जनवरी, २०२२
       सामाजिक जालस्थलपर शनिवार, २२ जनवरी २०२२ को एक दृश्यश्रव्य प्रसारित हुआ, जिसके आधारपर आरोप लगाया गया कि बजरंग दलके कार्यकर्ताओंने गुजरातके सूरतके मोरा ग्राम स्थित एक ‘मस्जिद’में ‘नमाज’को रोक दिया और विरोध किया । इसके पश्चात सूरतके कांग्रेस पार्षद असलम साइकिलवालाका एक ‘फेसबुक’ लेख आया, जिसमें उन्होंने प्रतिवाद किया कि, उक्त ‘शिवशक्ति सोसाइटी’के भीतर बनी संरचना जिसमें ‘नमाज’ हो रही थी, वह ‘वक्फ बोर्ड’की सम्पत्ति है ।
      वास्तवमें २०२० कोरोना सङ्क्रमण आपदाकी प्रथम लहरके मध्य ही एक मुसलमान व्यक्तिने अपनी सम्पत्तिको ‘वक्फ’के नाम पंजीकृत कर दिया; जिसके पश्चात यहां ‘नमाज’ पढा जाने लगा । लोगोंने ‘वक्फ’के नियमोंको एकांगी बताया है । कोई भी अपनी सम्पत्तिको ‘वक्फ’ बताकर इसे इस रूपमें पंजीकृतकर सकता है । कोई पडोसी इसमें कुछ नहीं कर सकता । नगरीय क्षेत्रोंमें ‘डिस्टर्ब एरिया एक्ट’के कारण जागरूकता भी है; किन्तु गांंवोंमें लोग कुछ समझ नहीं पाते ।
      जनवरी २०२२ के आरम्भमें गांधीनगरकी संस्था ‘एकता एज लक्ष्य’ने ३३ जनपदोंके ‘कलक्टरों’ एवं प्रमुखोंको एक पत्र लिखकर आग्रह किया कि ‘वक्फ बोर्ड’को भंग किया जाए । संस्थाने आरोप लगाया था कि ‘वक्फ बोर्ड’ अवैध रूपसे शासकीय, अर्ध शासकीय और निजी सम्पत्तियोंको अपने अतिक्रमणमें ले रहा है । इसके लिए ‘वक्फ एक्ट, १९९५’ के नियम-कानूनोंका उल्लङ्घन किया जाता है । भारतीय सशस्त्र बलों और रेलवेके अतिरिक्त ‘वक्फ बोर्ड’के पास ही सबसे अधिक सम्पत्ति है । इस ‘एक्ट’में हिन्दुओंके लिए कोई प्रस्ताव नहीं है । इसमें आरोप लगाया गया था कि इसमें केवल एक ही समुदायके लिए समस्त प्रावधान हैं; इसीलिए ये देशके संविधानकी ‘सेक्युलर’ विचारधाराके विरुद्ध है । इसमें लिखा गया था कि संविधानके विरुद्ध कोई नियम नहीं हो सकता और ‘वक्फ बोर्ड’को ‘गैर’-इस्लामी समुदायोंकी भावनाओंकी कोई चिन्ता नहीं है । इसमें भेदभाववाली नीति है । ‘वक्फ बोर्ड’के पास असीमित शक्तियांं हैं, जिनका दुरुपयोग करके सामान्य नागरिकको त्रस्त किया जाता है । २०२० तक ‘वक्फ बोर्ड’के पास ६५९८७७ अचल सम्पत्तियांं हैं । इनका क्षेत्रफल ८ लाख हेक्टेयर है, “इस प्रकार अवैध रूपसे सम्पत्तियोंको अपने नियन्त्रणमें लेना ‘लैंड जिहाद’का क्रियान्वयन है । ये देशव्यापी षडयन्त्र है; इसीलिए भेदभाववाले नियम-‘कानून’को परिवर्तित किया जाना चाहिए । सूरत और उसके निकटवर्ती ग्रामीण क्षेत्रोंमें सम्पत्तियोंको ‘वक्फ बोर्ड्स’को हस्तान्तरित किए जानेकी कई घटनाएं सामने आई हैं ।
        ‘वक्फ’में सम्पत्तिको ‘रजिस्टर’ करनेके लिए किसीकी अनुमतिकी आवश्यकता नहीं है । यह एकपक्षीय निर्णय होता है । सामान्यतः ‘सोसाइटी’के अध्यक्ष या समितिकी अनुमति चाहिए होती है, यदि आप अपनी सम्पत्ति हस्तान्तरित कर रहे हैं तो इससे अवैध अनुबन्धोंसे बचा जा सकता है; किन्तु कलको आपका मुसलमान पडोसी अपने घरको ‘वक्फ’से पंजीकृत करके इसे ‘मस्जिद’ घोषित कर दे और वहां ‘नमाज’के लिए जनसमूह आने लगे, तो आप कुछ नहीं कर सकते ।”
       ‘लव जिहाद’, ‘आर्थिक जिहाद’, ‘थूक जिहाद’ व ‘लैंड जिहाद’के माध्यमसे जिहादी देशकी समाज व्यवस्था, अर्थव्यवस्था, भोजन शैली व देशके व्यापक क्षेत्रवर्गका ‘इस्लामीकरण’ करते आ रहे हैं, जो देशके लिए अत्यन्त घातक है । भारत शासन सभी ‘वक्फ बोर्ड’की मान्यता निरस्त करे और देशमें समान नागरिक संहिता लागू करे ! – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सम्बन्धित लेख


सूचना: समाचार / आलेखमें उद्धृत स्रोत यूआरऍल केवल समाचार / लेख प्रकाशित होनेकी तारीखपर वैध हो सकता है। उनमेंसे ज्यादातर एक दिनसे कुछ महीने पश्चात अमान्य हो सकते हैं जब कोई URL काम करनेमें विफल रहता है, तो आप स्रोत वेबसाइटके शीर्ष स्तरपर जा सकते हैं और समाचार / लेखकी खोज कर सकते हैं।

अस्वीकरण: प्रकाशित समाचार / लेख विभिन्न स्रोतोंसे एकत्र किए जाते हैं और समाचार / आलेखकी जिम्मेदारी स्रोतपर ही निर्भर होते हैं। वैदिक उपासना पीठ या इसकी वेबसाइट किसी भी तरहसे जुड़ी नहीं है और न ही यहां प्रस्तुत समाचार / लेख सामग्रीके लिए जिम्मेदार है। इस लेखमें व्यक्त राय लेखक लेखकोंकी राय है लेखकद्वारा दी गई सूचना, तथ्यों या राय, वैदिक उपासना पीठके विचारोंको प्रतिबिंबित नहीं करती है, इसके लिए वैदिक उपासना पीठ जिम्मेदार या उत्तरदायी नहीं है। लेखक इस लेखमें किसी भी जानकारीकी सटीकता, पूर्णता, उपयुक्तता और वैधताके लिए उत्तरदायी है।

विडियो

© 2021. Vedic Upasna. All rights reserved. Origin IT Solution