पाकिस्तानमें एक और हिन्दू लडकीका अपहरणकर धर्मान्तरण किया, तथाकथित अल्पसंख्यक हितैषी इमरान खान मौन !!


अप्रैल १९, २०१९
   
पाकिस्तानके पंजाब प्रांतमें एक प्रभावशाली मुस्लिम व्यक्तिद्वारा एक हिन्दू किशोरीके अपहरण और बलात धर्मान्तरणके विरोधमें स्थानीय अल्पसंख्यकोंने विरोध प्रदर्शन किया । आंदोलन कर रहे लोगोंने लडकीको सुरक्षित वापस लानेके लिए इमरान खान शासनपर दबाव बनानेके लिए राजमार्गपर जाम भी लगाया । गत माह रहीम यार खान नामके नगरसे नैना नामकी १७ वर्षीय लडकीका अपहरण किया गया था । आरोप है कि क्षेत्रके प्रभावशाली व्यक्ति ताहिर तामरीने अपने पिता और भाइयोंकी सहायतासे यह किया । उल्लेखनीय है कि गत माह भी दो हिन्दू लडकियोंका अटहरणकर धर्म परिवर्तन कराया गया था ।

नैनाके पिता रघुरामकी ओरसे ५ अप्रैलको प्रविष्ट की गई प्राथमिकीके अनुसार, १३ मार्चको लगभग ६ लोगोंने उनकी पुत्रीका अपहरण किया और मुख्य आरोनी ताहिर तामरी उनकी पुत्रीको कराचीके दक्षिणी बंदरगाहपर ले गया । १४ मार्चको कराचीमें जमातुल सईद गुलशन-ई-मईमारमें एक समारोहमें उनकी पुत्रीको बलात इस्लाम स्वीकार कराया गया । इस्लाममें परिवर्तित करनेके बाद नैनाको नूर फातिमा नाम दिया गया और आरोपीसे निकाह कराया गया । नैनाके पिताने बताया कि उनकी पुत्रीको इस्लाम स्वीकार करानेका विडियो सामाजिक प्रसार माध्यमपर डाला गया ।
गत दो सप्ताहमें पुलिसद्वारा युवतीको ढूंढनेमें असफल होनेके पश्चात हिंदू समुदायके लोगोंने लियाकतपुरमें राजमार्गको जाम कर दिया । समुदायके लोग दो दिनसे प्रदर्शन कर रहे हैं, जबकि कुछ लोग ‘लियाकतपुर प्रेस क्लब’के बाहर नारे लिखी तख्तियां लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं । इनपर लिखा है, ‘हिंदू लडकियोंका अपहरणकर धर्मान्तरण कराना बंद करो ।’


प्रदर्शनके समय युवतीके माता-पिताने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला तो वे अपने घरको आग लगा देंगे । यद्यपि पुलिसने उन्हें विश्वास दिलाया है कि उन्हें न्याय दिलानेके लिए सभी संसाधनोंका प्रयोग किया जाएगा ।


रहिमयार खान नगरके उच्च पुलिस अधिकारी उमर फारुक सलामतने कहा कि उन्होंने एक पुलिस दलको कराची बंदरगाहपर युवतीके लिए भेजा है ।

 

“पाकिस्तानका उच्च न्यायालय कुछ दिवस पूर्व सिद्ध कर रहा था कि युवतियां स्वेच्छासे इस्लाम स्वीकार की हैं तो क्या अब वहांके तथाकथित न्यायदाता कुछ कहेंगें । वर्षोंसे यह अधर्म पाकिस्तानकी भूमिपर हो रहा है और वहांके शासन, न्यायालय, नेता और सामाजिक कार्यकर्ता सभी मौन रहते हैं । समूचे विश्वमें डो बजाकर नारियोंके विषयमें बोलनेवाली मलाला भी इसपर मौन रहती है, इससे ज्ञात होता है कि यह इन सभीका ही मिला षडयन्त्र है, जो इस्लामिक मानसिकताका परिचायक है । भारत स्वयं अपने हिन्दवी अस्तित्वके लिए लड रहा है, तो वह वहांके हिन्दुओंकी क्या सहायता करेगा । हिन्दुओंने अब अपनी सहायताके लिए स्वयं सज्ज होना चाहिए और मिलकर रहना चाहिए और अनुचित कृत्योंका एक साथ आकर मुखर होकर विरोध करना चाहिए, तभी अस्तित्व शेष रह पाएगा ।”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 

स्रोत : नभाटा



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