मन्दिरकी पूजा, पुजारियोंकी है व्यष्टि तथा समष्टि साधना
मन्दिरके पुजारियोंने ‘यह मेरी व्यष्टि तथा समष्टि साधना है’, ऐसा दृष्टिकोण रख साधना की तो उनकी वैयक्तिक आध्यात्मिक उन्नति होगी तथा हिन्दुओंको भी धर्मशिक्षण मिलनेमें सहायता होगी । – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले, संस्थापक, सनातन संस्था
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