जून १४, २०१८
भारतके उच्चतम न्यायालयने ओडिशाके ‘जगन्नाथ पुरी’ देवालयका प्रबन्धन अपने हाथमें लेनेका निर्णय लिया है । उच्चतम न्यायालय इससे पहले भी केरलके पद्मनाभ स्वामी देवालयका प्रबन्धन बहुत कुछ अपने हाथोंमें ले चुका है और मध्य प्रदेशके उज्जैनमें स्थित महाकालेश्वरके प्रबन्धनके लिए भी निर्देश दे चुका है । न्यायालयके हस्तक्षेपका प्रखर हिन्दू संगठनोंने व्यापक विरोध किया है । न्यायालय इस बातपर सहमत है कि वह एक देवालयके प्रबन्धनमें सुधारके बाद दूसरेकी करेगा; यद्यपि इस सम्बन्धमें इससे बडा अभियोग जिसमें हिन्दू देवालयोंका नियन्त्रण राज्यको सौंपनेकी बात कही गई है, अभी लम्बित पडा हुआ है ।
वर्ष २०१२ में स्व. दयानन्द सरस्वतीने उच्चतम न्यायालयमें हिन्दू देवालयोंपर शासनके नियन्त्रणकी संवैधानिकताको चुनौती दी थी । यह बात भी याचिकामें कही गई थी कि केवल हिन्दू देवालयोंपर ही नियंत्रण क्यों ?, जबकि अन्य धर्मोंको अपनी संस्थाओंका प्रबन्धन करनेकी अनुमति दी गई है । यह अभियोग गत एक वर्षसे अपने अन्तिम समयमें चल रहा है ।
गत सप्ताह १२ शताब्दीके जगन्नाथ देवालयमें श्रद्धालुओंके कथित शोषणके समाचार आनेके पश्चात उच्चतम न्यायालयने संज्ञान लिया था । न्यायालयने शासनको देवालयके प्रबन्धनके विषय में कुछ दिशा-निर्देश दिए थे । न्यायालयने इस प्रकरणमें अपनी सहायताके लिए वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल सुब्रमण्यमको न्याय मित्र बनाया है ।
सुब्रमण्यम पद्मनाभ स्वामी देवालय प्रकरणमें भी न्याय मित्र हैं । वह ‘भारतीय क्रिकेट कण्ट्रोल बोर्ड’के (बीसीसीआई) प्रबन्धनमें प्रशासकीय सुधारके लिए भी न्यायालयकी सहायता कर रहे हैं । पद्मनाभ स्वामी और ‘बीसीसीआई’ दोनों ही प्रकरणमें कार्य प्रगति पर है । एक और संयोग ये भी है कि न्यायालयने एक ही सेवानिवृत्त नौकरशाह पूर्व ‘सीएजी’ विनोद रायको दोनों ही प्रकरणको देखनेका उत्तरदायित्व दिया है ।
ओडिशा उच्च न्यायालय भी जगन्नाथ देवालयके प्रबन्धनसे सम्बन्धित प्रकरणकी सुनवाई कर रही है । दो सप्ताह पूर्व १६ सदस्यीय दल, जिसमें तीन विशेषज्ञ भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभागसे थे, उन्होंने रत्न भण्डारकी जांच की थी । उन्होंने यह भी देखा था कि क्या जीर्णोद्धारका भी कोई काम चल रहा है ?
ये जनहित याचिका उच्चतम न्यायालयमें नवीन पटनायक शासनके आदेशके एक सप्ताह बाद ही की गई है । नवीन पटनायक शासनने कोषकी चाभी खोनेके प्रकरणकी न्यायिक जांचके आदेश दिए हैं !
स्रोत : जनसत्ता
Leave a Reply