आयुर्वेद अपनाएं स्वस्थ रहें (भाग – २५.३)


कल हमने प्याजकी सेवन विधि व कुछ लाभके विषयमें जाना था, आज हम इससे होनेवाले कुछ अन्य लाभोंके विषयमें जानेंगें –
* मधुमेहके लिए – मधुमेह ऐसा रोग है, जो किसी भी समय, किसीको भी हो सकता है । यदि आप बाहरका भोजन, रिफाइंड तेल, चीनी आदि खाते हैं और गतिहीन जीवन शैली व्यतीत कर रहें हैं तो आपको मधुमेह होनेकी सम्भावना अधिक हो सकती है । प्याजमें ‘क्रोमियम’ होता है (क्रोमियम अधिकतर शाकमें नहीं पाया जाता है, जिनका हम दैनिक रूपसे प्रयोग करते हैं) । यह शरीरमें रक्त शर्कराके स्तरको नियन्त्रित करनेमें सहायक है और हमारी मांसपेशियों और शरीरकी कोशिकाओंको धीरे-धीरे ग्लूकोज देता है । मधुमेहमें सबसे बडी समस्या एक सुरक्षित रक्त शर्कराका स्तर बनाए रखना होती है; इसलिए प्याज खानेसे रक्त शर्कराके स्तरको नियन्त्रित करनेमें सहायता मिल सकती है, जो मधुमेह रोगियोंके लिए महत्वपूर्ण है । रक्त शर्कराको बनाए रखनेके लिए कच्चा प्याज खानेका परामर्श दिया जाता है । (आजके अधिकांश लोग शारीरिक श्रम नहीं करते हैं या नहीं करना चाहते हैं; इसलिए अब प्याजका सेवन करने हेतु सभीको कहा जाता है ।)
* मच्छरोंके काटनेसे (इन्सेक्ट बाईटसे) बचाए – मधुमक्खीके डंकसे होनेवाली वेदनाको अल्प करनेके लिए प्याजके रसका उपयोग कर सकते हैं । इसके साथ-साथ ताजा प्याजका रस या पेस्ट बिच्छूके डंक और अन्य कीटके काटनेपर बाहरी रूपसे भी प्रयोग किया जा सकता है । प्याजकी गंध कीडेको भगानेमें भी सहायक है ।
* कर्करोगमें (कैंसरमें) – प्याज कई प्रकारके यौगिकोंसे समृद्ध होता है, जो कर्करोग कोशिकाओंके विकास और प्रसारको सफलतापूर्वक रोकता है । ‘कुएरसेटीन’ (Quercetin) एक अत्यधिक शक्तिशाली आक्सीकरणरोधी यौगिक है, जो कर्करोगके प्रसारकी रोकथामके लिए जाना जाता है । प्याजमें यह यौगिक पर्याप्त मात्रामें होता है । ‘विटामिन-सी’ भी एक सशक्त आक्सीकरणरोधी यौगिक है, जिससे शरीरमें मुक्त कणोंकी (फ्री रेडिकल्सकी) उपस्थिति और प्रभाव अल्प हो सकते हैं ।
* कर्णवेदनामें (कान दर्दमें) लाभकारी – प्याजके रसकी कुछ बूंदें वास्तवमें कर्ण वेदनासे ग्रस्त व्यक्तियोंके लिए अत्यधिक लाभप्रद सिद्ध हो सकती हैं । इसके लिए रूईके एक टुकडेके माध्यमसे कानमें हो रही सनसनाहटको दूर करनेके लिए प्याजके रसका उपयोग किया जा सकता है । इस उपायसे कर्णवेदनामें लाभ मिलता है । एक विवरणके अनुसार, अधिकतर लोग कानके रोगोंके लिए प्याजका प्रयोग करते हैं । उनका मानना है कि प्याजका रस कानमें डालनेसे वेदनामें लाभ मिलता है । इसके लिए प्याजको गर्म करें, उसका रस निकालें और उस रसकी कुछ बूंदोंको कानमें डालें ।
* त्वचाके लिए – प्याजमें ‘विटामिन-ए, सी और ई’ पाया जाता है । ये सभी ‘विटामिन’ त्वचाके स्वास्थ्यके लिए अत्यधिक लाभदायक होते हैं । ये सभी विटामिन मुक्तकणोंके कारण त्वचाकी आयु बढनेकी प्रक्रियाको रोकते हैं । प्याज एक शक्तिशाली रोगाणुनाशक (एंटीसेप्टिक) भी है; इसलिए यह त्वचाको विषाणुओंसे भी बचाता है । प्याजमें ‘विटामिन-सी’ पाया जाता है । सम्भवतः आपको ज्ञात न हो, परन्तु ‘विटामिन-सी’का सेवन त्वचाको कान्तियुक्त बनानेमें सहायक है । मधु (शहद) या जैतूनके तेलके साथ प्याजके रसका मिश्रण मुंहासेके उपचारके लिए सबसे उत्तम चिकित्सा है । प्याज सूजनको अल्प करनेवाली शाकोंमेंसे एक है; इसलिए प्याजमें उपस्थित सक्रिय यौगिक मुंहासेके कारण हुई लालिमा और सूजनको अल्प करनेमें भी सहायता कर सकते हैं ।
कल हम प्याजके सेवनसे होनेवाले कुछ अन्य लाभोंके विषयमें बताएंगें ।



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