एक कहावत है, जिनके घर शीशेके होते हैं, वह दूसरोंके घरोंपर पत्थर नहीं मारा करते ! साध्वी प्रज्ञा ठाकुरपर अंगुली उठानेवाले बहिर्मुख राजनितिक दल यही कर रहे हैं; इसलिए उनकी सर्वत्र किरकिरी हो रही है |
आज भारतमें ३० से ४० % राजनेताओंपर सामान्य नहीं अपितु हत्या, बलात्कार एवं भ्रष्टाचारके गम्भीर आरोप हैं और ऐसे अनेकों जमानतपर मुक्त होकर नेतागिरी कर रहे हैं ! तब भी वे निर्लज्ज होकर दूसरोंपर अंगुली उठाते हैं ! सचमें धर्मविहीन समाज कितना बहिर्मुख हो सकता है, यह उसका बहुत ही अच्छा उदाहरण है !
Leave a Reply