‘रजा अकादमी’की याचनापर चलचित्र ‘मोहम्मद’पर प्रतिबन्ध; परन्तु ‘कश्मीर फाइल्स’को करमुक्त करनेकी मांगकी उपेक्षा ! यह कांग्रेसका कैसा राष्ट्रवाद ?
१६ मार्च, २०२२
‘द कश्मीर फाइल्स’ चलचित्रको महाराष्ट्रमें करमुक्त करनेके सन्दर्भमें महाराष्ट्रके गृहमन्त्री दिलीप वलसे-पाटीलका वक्तव्य उनकी हिन्दुओंके प्रति असंवेदनशीलताको दर्शाता है । सम्पूर्ण देशमें प्रसिद्धि प्राप्त करनेवाला यह चलचित्र १९९० में कश्मीरी हिन्दुओंके विस्थापनसे सम्बन्धित है अथवा १९४७ के भारत-पाकिस्तान विभाजनसे सम्बन्धित है । यह भी गृहमन्त्रीको ज्ञात न होना अत्यन्त दुर्भाग्यपूर्ण है । वर्ष १९४७ के विभाजनके बारेमें उन्होंने कहा कि लोगोंका यहां वहांसे आना-जाना हुआ । ऐसा सहज वक्तव्य भी एक राज्यके गृहमन्त्री पदपर आरूढ व्यक्तिको शोभा नहीं देता ।
उल्लेखनीय है कि राष्ट्रवादी कांग्रेस दलके पूर्व गृहमन्त्री अनिल देशमुख जो वर्तमानमें कारागृहमें हैं । उन्होंने जुलाई २०२० में ‘मोहम्मद द मैसेंजर ऑफ गॉड’ नामक ईरानी चलचित्रपर बिना देखे ही ‘रजा अकेडमी’के कहनेपर महाराष्ट्रमें प्रतिबन्ध लगा दिया था । अब ‘द कश्मीर फाइल्स’को करमुक्त करनेकी मांगकी उपेक्षा की जा रही है ।
महाराष्ट्रके गृहमन्त्रीके भारतीय इतिहासका ज्ञान स्तब्ध करनेवाला है । वर्ष १९४७ के विभाजनमें विस्थापितोंका पलायनकर आनेको इधर-उधरसे आना-जाना कहना, कश्मीरी हिन्दुओंपर हुए जघन्य अत्याचारोंपर असंवेदनशील होना, दोनों ही अतिशय लज्जाजनक है । उन घटनाओंके कालमें तो हिन्दुओंको असहाय छोड दिया था । अब चलचित्रको करमुक्त कर ही अपना कर्तव्य निभा जाते । अत्यन्त लज्जाजनक ! – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
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