सत्त्व, रज और तम प्रधान राजाओंके वलयका प्रभाव वैश्विक स्तरपर पडता ही है ! एक तामसिक राज्यकर्ता अपनी कुटिलतासे थोडी-बहुत प्रसिद्धि पा सकता है, उसे समाज कुछ कालतक उसके घृणित कार्योंके लिए स्मरण भी करता है या वह अपनी स्तुति करवाने हेतु भिन्न प्रपंच भी रचता है !
उससे अधिक प्रभाव राजसिक राज्यकर्ताका होता है और अनेक राजसिक राज्यकर्ता उससे प्रभावित होकर अपनी स्वार्थसिद्धि हेतु मित्रताका हाथ बढाते हैं; किन्तु सात्त्विक राज्यकर्ताओंके पदासीन होनेसे संसार स्वतः ही उसके संरक्षणमें शरणागत होने हेतु लालायित होता है ! भगवान श्रीराम एवं अन्य हिन्दू चक्रवर्ती राजा इसके उदाहरण हैं !
२०२३ से आरम्भ होनेवाले हिन्दू राष्ट्रमें धर्मनिष्ठ, सात्त्विक व तेजस्वी राज्यकर्ता होंगे; जिनके लिए धर्मका संरक्षण व संवर्धन उनका प्रधान कार्य होगा; इससे समाज सुखी होगा एवं अध्यात्ममें प्रगति करेगा, संसारके अनेक देश स्वतः ही भारतकी हिन्दू-राष्ट्र-प्रणालीको अपनाने हेतु हमसे आग्रह करने लगेंगे, आसपासके छोटे देश स्वतः ही भारतमें विलय हेतु हाथ बढाएंगे और इसप्रकार आनेवाले कालमें, इस देशका मानचित्र पुनः विशाल हो जाएगा । भारत, धर्मगुरु एवं विश्वगुरुके रूपमें स्थापित होकर सम्पूर्ण विश्वमें हिन्दू साम्राज्यकी स्थापना करेगा ! यह सत्त्व गुणका महत्त्व है ! शास्त्र है, जो जितना सूक्ष्म होता है, उसका प्रभाव उतना ही अधिक होता है, सत्त्व गुण तीनों गुणोंमें सूक्ष्मतम है और तमोगुण जडत्वका प्रतीक है; अतः राष्ट्रके सर्वांगीण विकास हेतु राजाका हिन्दुनिष्ठ एवं साधक होना अति आवश्यक होता है, यही हमारा राजधर्म कहता है !
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