राम मंदिरपर एक और तिथि मिलनेसे लोग क्रोधित, न्यायमूर्ति गोगोईपर ‘रासुका’ लगानेकी मांग !!


जनवरी १०, २०१९

राम मंदिरको लेकर प्रतीक्षा अभी और लम्बी होनेवाली है; क्योंकि इस प्रकरणकी सुनवाई न्यायालयने २९ जनवरीके लिए टाल दी है ! मुस्लिम पक्षकार राजीव धवनके न्यायाधीश यूयू ललितको लेकर आपत्ति प्रकट करानेके पश्चात अब २९ जनवरीको नूतन पीठका गठन होगा । इसमें एक और तिथि मिलनेके पश्चात न्यायालयके बाहर खडे लोगोंका क्रोध बढ गया और प्रदर्शन करने लगे । एक गुटने तो मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोईपर ‘रासुका’ लगाने तककी तख्ती लहरा डाली ।

 

उल्लेखनीय है कि मुस्लिम पक्षकारने न्यायाधीश ललित और उत्तरप्रदेशके पूर्व मुख्यमन्त्री कल्याण सिंहके सम्पर्कको लेकर प्रश्न उठाए, जिसके पश्चात न्यायाधीश ललितने स्वयंको इसकी सुनवाईसे भिन्न कर लिया है । इसके अतिरिक्त हिंदू महासभाके अधिवक्ताने लिखितपत्रोंके अनुवादकी जांच करनेकी मांग की है । वहीं बाहर खडी महिला प्रदर्शनकारी भी अत्यधिक आक्रोशित थीं और उनका प्रदर्शन इतना उग्र था कि पुलिसको उन्हें बन्दी बनाना पडा ।

न्यायालयमें कुल १३८८६ पृष्ठोंके लिखितपत्र प्रस्तुत किए गए और २५७ सम्बन्धित लिखितपत्र और वीडियो टेपकी जांच होनी शेष है ।


इसके अतिरिक्त उच्च न्यायालयके निर्णयके ४३०४ ‘प्रिंटेड’ और ८५३३ टाईप किए पृष्ठोंका भी अनुवाद  २९ जनवरी तक पूरा करनेके निर्देश दिए गए हैं । उल्लेखनीय है कि इससे सम्बन्धित मूल लिखितपत्र अरबी, फारसी, संस्कृत, उर्दू और गुरमुखीमें लिखे गए हैं । वहीं कई प्रदर्शनकारियोंने मानव श्रृंखला भी बनाई और शीघ्र राम मंदिरपर निर्णय की मांग की ।

३० सितंबर, २०१० को इलाहाबाद उच्च न्यायालयकी लखनऊ पीठने अयोध्या प्रकरणपर ऐतिहासिक निर्णय सुनाया था ।

न्यायाधीश सुधीर अग्रवाल, एसयू खान और डीवी शर्माकी पीठने अपने निर्णयमें २.७७ एकडकी विवादित भूमिको तीन समान भागोंमें वितरित कर दिया था ।
जिसमें रामलला विराजमानवाला भाग हिन्दू महासभाको, दूसरा निर्मोही अखाडेको और तीसरा सुन्नी वक्फ बोर्डको दिया गया था ।

 


“जब तक धर्मके सभी निर्णय माननीय शंकराचार्य व सन्तोंद्वारा नहीं लिए जाएंगें व हिन्दू केवल न्यायालयोंकी ओर देखता रहेगा, तबतक हिन्दुओंकी ऐसे ही विडम्बना होती रहेगी । न्यायालयोंकी हिन्दुओंके प्रति नीति सर्वविदित है, यह हम सबरीमाला और देवालयोंके नियन्त्रणपर न्यायालयोंके निर्णयोंसे जान ही चुके हैं, केन्द्र शासनसे भी अब आशा नहीं की जा सकती; क्योंकि वे अपना पक्ष स्पष्ट कर ही चुके हैं; अतः अब हिन्दुओंका धर्माभिमानी, राष्ट्रनिष्ठ होना आवश्यक है, तभी ही हिन्दुओं व उनके अस्तित्वको बनाए रखा जा सकता है !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 

स्रोत : अमर उजाला



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