धर्मान्ध मुश्ताकने युवतीसे विवाहकर उसे मुम्बईमें बेचा !!


मार्च ३०, २०१९

 

झारखण्डके बोकारोकी रहनेवाली युवतीको उसने पहले प्रेमके जालमें फंसाया, विवाह किया और स्वप्न दिखाकर उसे मायानगरी मुम्बई ले गया । वहां पत्नीको किसी व्यक्तिके हाथों बेच दिया । नौ माहतक युवतीसे दुष्कर्म होता रहा । इस मध्य उसे बंधक बनाकर रखा गया । उसे प्रताडित किया जाता रहा । लडकी कठिनाईसे मुम्बईसे भागकर रांची पहुंची है । यहां उसने पुलिसको अपनी आपबीती बताते हुए सारी जानकारी दी ।

युवती झारखण्डके बोकारोकी रहनेवाली है । उसका पति मुश्ताक अंसारी जिसपर उसे बेचनेका आरोप लगा है, गिरिडीहका रहनेवाला है । पुलिस समूचे प्रकरणकी जांचमें लगी है । पहले रांची स्थित महिला थाना, उसके पचात युवतीको कांके स्थित नारी निकेतनमें रखवाया गया है । शुक्रवार, २९ मार्चको कोतवाली थाना स्थित एएचटीयू (एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट) थानेमें प्रकरण प्रविष्ट किया गया है ।

युवतीने पुलिसको बताया कि उसे प्रेमके जालमें फांसकर गिरिडीहके निमियाघाट निवासी मुश्ताक अंसारीने (४५) भगाकर विवाह कर लिया । मुश्ताक पहलेसे विवाहित था । विवाहके पश्चात वह घर ले गया । कुछ ही समय पश्चात उसे मारपीट कर घर से निकाल दिया । उसे पुनः अपने साथ रखनेका झांसा दिया और सीधे मुंबई ले गया । इसके पश्चात वहां किसी व्यक्तिको बेच दिया ।

एक कक्षमें उसे बंधक बनाकर रखा गया । प्रत्येक दिवस नशेमें उसके साथ दुष्कर्म किया जाता रहा । लगभग नौ महीनेतक बंधक बनी रही । एक दिवस बंधक रखनेवाला व्यक्ति जब नशेमें धुत था तो प्रातःकाल तीन बजे खिडकी तोड़कर भाग निकली । वह किसीप्रकार रांची पहुंची । पहले हटिया जीआरपी पहुंची और आपबीती सुनाई । वहांसे उसे महिला थाना भेजा गया । इधर एएचटीयू थाना प्रभारी श्यामानंद मंडलने बताया कि समूचा प्रकरण गिरिडीहके निमियाघाट थानेसे जुडा है । युवतीके आवेदनपर जीरो एफआइआर कर निमियाघाट थाने भेज दिया गया है ।

युवती ने बताया कि जब बंधक बने व्यक्तिके पास से भागी तो ऑटो चालकने अनुचित दृष्टि डाली । जब युवतीको समझ आ गया, तो बोली कि मैं पुलिसको चलभाष कर चुकी हूं; इसलिए मुझे रेलवे स्थानक (स्टेशन) ही पहुंचाओ, इसके पश्चात स्टेशन पहुंची । वह रेलयानपर बैठी तो चेन्नई पहुंच गई । वहां किसी जीआरपी थाना पहुंची और पूरी बात बताई, तो उसे रांचीके लिए रेलयानमें बैठा दिया गया ।

युवतीका कहना था कि उसने स्वयंको बेचे जानेकी जानकारी गिरिडीहके निमियाघाट थानेदारको दी थी । निमियाघाटके थानेदारका नाम वह नहीं जानती ।

 

“हिन्दू युवतियो ! अपने संस्कारोंका त्यागकर उच्छृंखलतासे की गई कृति नारीवाद नहीं कहलाती ! लज्जा, धर्मपालन व संस्कार ये नारीके आभूषण है, जब नारियां इन्हें त्यागती है तो असुर उसे नियन्त्रित अर लेते हैं । वासनान्ध धर्मान्ध रूपी असुरोंसे बचाव हेतु आवश्यक है कि सनातन धर्मका पालनकर इसके सर्व संस्कारों व नियमोंका पालन किया जाए, तभी जिहादियोंसे स्वयंका रक्षण कर पाएंगीं ! जिहादी प्रेम नहीं वासनासे पूर्ण होता है, जिसका लक्ष्य हिन्दू युवतियोंका जीवन नष्ट करना है, यह ध्यानमें रखें !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 

स्रोत : दैनिक जागरण



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