क्रांति यशस्वी होने हेतु प्रखर राष्ट्राभिमानके साथ ही साधनाका बल होना आवश्यक है !
साधनाका बल और समर्थ रामदास स्वामीके मार्गदर्शन होनेके कारण छत्रपति शिवाजी महाराज हिन्दू धर्मराज्यकी स्थापना करनेमें सफल हुए । अनेक क्रांतिकारी प्रखर राष्ट्रवादी होनेपर भी साधनाका बल न होनेके कारण वे यशस्वी नहीं हो पाए और उन्होंने अपने प्राण भी गवाएं ! समर्थ रामदास स्वामीने दासबोधमें कहा है –
सामर्थ्य होता है आन्दोलनमें जो जो करते हैं उनमें;
परन्तु उसमें परमेश्वरका अधिष्ठान आवश्यक है ।। – दासबोध
अर्थ : आन्दोलन करना अपने हाथमें होता है; परन्तु कार्यका योग्य नियोजन एवं कार्यके यशस्वी होने हेतु परमेश्वरका अधिष्ठान और साधना आवश्यक है ! – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले
Leave a Reply