आजके राज्यकर्ताओंके राजधर्मसे सम्बन्धित निर्णयको देखकर यह ज्ञात होता है कि जैसे मात्र राष्ट्रका अहित करनेके लिए ही वे पदका दुरुपयोग करते हैं । जो अपराधीवृत्तिके लोग, सेना एवं सुरक्षाकर्मियोंपर पथराव करनेकी धृष्टता कर सकते हैं, ऐसे राष्ट्रद्रोहियोंको कठोर दण्ड देनेके स्थानपर उनका अभिज्ञान भी गुप्त रखनेका शासनद्वारा प्रयास होता रहा है, इससे ही समझ लें कि शासन किस प्रकार राष्ट्रद्रोहियोंका पोषण कर रहा है ? अपराध तो अपराध होता है, जैसे कोई प्रथम बार किसीको मृत्युके घाट उतारे तो उसे क्षमादान नहीं दिया जा सकता है, उसीप्रकार अपने प्राणोंको हथेलीपर रख, इस राष्ट्रकी सुरक्षा करनेवाले सैनिकोंपर पथराव करनेवालोंका पाप क्षम्य कैसे हो सकता है ? यह तो अन्धेर नगरी चौपट राजाके तथ्यकी पुष्टि करता है । राष्ट्रद्रोहियोंको क्षमादान देकर नहीं; अपितु दण्ड देकर सुधारा जा सकता है, यह सामान्य सा तथ्य आजके राज्यकर्ताओंको ज्ञात नहीं, इससे ही समझ लें कैसा काल आ चुका है ।
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