जनवरी २७, २०१९
गणतन्त्र दिवस प्रदर्शनमें इस बार १६ राज्योंकी झांकी राजपथपर देखनेको मिली; परन्तु इनमेंसे तमिलनाडुकी झांकीपर विवाद आरम्भ हो गया है । इसमें महिलाओंको बिना चोलीके (ब्लाउजके) केवल साडीमें दिखाया गया था ! तमिलनाडुकी इस झांकीमें महात्मा गांधीकी १९२१ की उस मदुरै यात्राको दिखाया गया था, जिसके पश्चात उन्होंने वस्त्र त्याग दिए थे और केवल एक धोती पहननेका निर्णय किया था ।
राजनीतिक दल द्रविड इयक्का तमिझर पेरावईके महासचिव सुबा वीरापांडियनने कहा कि महात्मा गांधीने २२ सितंबर १९२१ को अपनी मदुरै यात्राके पश्चात केवल एक धोती पहननेका निर्णय किया था । उन्होंने कहा कि यह महात्मा गांधी और तमिलनाडुके लिए महत्वपूर्ण घटना थी; परन्तु १९२१ में महिलाएं इसप्रकारके वस्त्र नहीं पहनती थीं, जैसा झांकीमें दिखाया गया है । त्रावणकोर क्षेत्रमें महिलाएं इसप्रकारका पहनावा पहनती थीं; परन्तु महिलाओंके चोली पहननेपर प्रतिबन्धको १९वीं शताब्दीमें ही समात कर दिया गया था ।
उन्होंने कहा ऐसा नहीं होना चाहिए था, वह भी तब जब उस प्रदर्शनको समूचा विश्व देख रहा था । असंगठित मजदूर संघकी सलाहकार आर गीताने भी कहा कि बिना चोलीके महिलाओंको दिखानेसे बचा जा सकता था ।
उधर राज्यके सूचना और प्रसारण विभागके एक अधिकारीने कहा कि झांकीका उद्देश्य महात्मा गांधीके १५०वीं जन्म जयंतीके अवसरपर उनके जीवनसे सम्बन्धित किसी घटनाको दिखाना था । उन्होंने कहा, ‘हमें इससे सम्बन्धित कई दूरभाष मिले हैं । यद्यपि इसको इसीलिए चुना गया था; क्योंकि बहुतसे लोगोंको गांधी और तमिलनाडुके इस सम्बन्धके बारेमें नहीं ज्ञात होगा ।’
“संस्कृतिका लोप होनेपर ही ऐसे कृत्य होते हैं । तमिलनाडुका निधर्मी शासन प्रदर्शित क्या करना चाहता है ? नारी शक्ति हमारे लिए पूजनीय है और उन्हें ऐसे घृणित रूपमें प्रदर्शित करनेसे भारतीय संस्कृतिका समूचे विश्वमें अपमान हुआ है; केन्द्रने राज्यसे वार्ताकर इसपर चेतावनी देनी चाहिए, जिससे ऐसे दुष्कृत्य पुनः न हो सकें !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : नभाटा
Leave a Reply