बांग्लादेशमें रोजा इफ्तारके समय हिन्दुओंको आमन्त्रित कर परोसा गया गोमांस
०१ मई, २०२२
बांग्लादेशके सिलहट जनपदमें एक रोजा इफ्तारके कार्यक्रममें हिन्दुओंको गोमांस परोसनेका समाचार है । इस इफ्तारमें सम्मिलित हुए लोगोंके मध्य गोमांसके अतिरिक्त कोई अन्य खाद्य पदार्थ नहीं परोसा गया । समाचार सामाजिक जालस्थलपर भी प्रसारित हो रहा है । प्रकरण २८ अप्रैल २०२२ का है । समाचार प्रतिवेदनके अनुसार इफ्तार बांग्लादेश ‘नेशनलिस्ट पार्टी’द्वारा आयोजित किया गया था, जिसमें हिन्दू धर्मके लगभग २० लोग सम्मिलित हुए थे । इन सभीको शेष ‘खाने’के साथ गोमांस भी परोसा गया । वहीं सम्मिलित हुए हिन्दुओंने इस घटनाकी निन्दा करने हेतु सामाजिक जालस्थलका प्रयोग किया । ‘बीएनपी’के ही एक सदस्य मंजूनाथने लिखा कि “मैं और शेष हिन्दू ‘बीफ’के अतिरिक्त कोई और विकल्प न होनेके कारण मुसलमान कार्यकर्ताओंको बस रोजा तोडता देख रहे थे ।” वहीं अन्य हिन्दू नेता कनक कांति दासने इस इफ्तारीको ‘तमाशा’ बताया और लिखा कि “आपने इफ्तारीके मजे लिए और हम हिन्दू बस देखते रहे ।” वहीं राजनीतिक दलने इसे स्वीकार तो किया; परन्तु क्षमा नहीं मांगी । अन्य एक प्रकरणमें उस ‘दुकानदार’को बन्दी बनाया गया, जिसने ‘चिकन बिरयानी’में गोमांस परोस दिया । प्रतिवेदनके अनुसार बांग्लादेशके चटगांवमें सुपन नामका एक लडका अपने जन्मदिवसके उपलक्ष्यमें मित्रोंके साथ भोजनालयमें ‘चिकन बिरयानी’ खाने गया था । उस आपणीका नाम ‘दुबई रेस्तरां’ और ‘बिरियानी हाउस’ था । वहां उसे ‘चिकन बिरयानी’में गोमांस परोस दिया गया । इसकी जानकारी होते ही सुपनने ‘पुलिस’को परिवाद किया एवं ‘पुलिस’ने ‘होटल मैनेजर’ मंजूर अहमदको कारागृह भेज दिया । प्रकरण बांग्लादेशके पत्रकार सौमिकने ‘ट्विटर’के माध्यमसे साझा किया ।
चिरकालसे हम सभी इस बातसे अवगत हैं कि जिहादी कभी भी विश्वासके पात्र नहीं रहे हैं; अतः इससे सीख लेकर सभी हिन्दू इनसे उचित दूरी सदैव बनाए रखें ! – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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