पीडित कश्मीरी हिन्दुओंकी मांगें पूर्ण होनेतक लडते ही रहेंगे, श्री. सुशील पण्डित, संस्थापक, ‘रूट्स इन कश्मीर’


२० जनवरी, २०२२
           १९ जनवरीको ‘हिन्दू जनजागृति समिति’की ओरसे आयोजित ‘कश्मीरी हिन्दू विस्थापन दिवस, कश्मीरी हिन्दुओंको न्याय कब मिलेगा ?’ इस विशेष ‘ऑनलाइन’ संवादमें ‘रूट्स इन काश्मीर’के संस्थापक श्री. सुशील पण्डितने स्पष्टरूपसे कहा, “वर्ष १९९० में कश्मीरमें हिन्दुओंकी सामूहिक हत्याएं हुईं । शासन उसे ‘नरसंहार’के रूपमें स्वीकार करे ! इस नरसंहारके लिए उत्तरदायी सभी दोषियोंको कठोर दण्ड दिया जाए । इस नरसंहारमें वहांके धर्मान्ध मुसलमानोंने पीडित हिन्दुओंकी भूमि हडप ली, उन्हें हिन्दुओंको पुनः दिया जाए और विस्थापित हिन्दुओंको कश्मीरमें पुनः आकर रहनेके लिए विशिष्ट भूमि दी जाए, हमारे ये अनुरोध केन्द्र शासनके पास हैं । दुर्भाग्यवश, वर्तमान केन्द्र शासनभी इस नरसंहारके लिए जो उत्तरदायी थे, उनका मन जीत लेनेमें व्यस्त हैं; परन्तु हम कश्मीरी हिन्दू झुकेंगे नहीं और हम हमारी सभी मांगें पूर्ण  होनेतक लडते ही रहेंगे ।”
         उन्होंने आगे कहा, “कश्मीरी हिन्दुओंकी हत्याएं करनेवाले अभी जीवित हैं, उनपर किसीभी न्यायालयमें अभियोग नहीं चल रहा है । जो भी लोग कश्मीरी हिन्दुओंके दोषी हैं, उनपर अभियोग प्रविष्ट होने चाहिए थे; परन्तु ऐसा कुछ नहीं हुआ, इसके विपरीत अभीतकके केन्द्र शासनोंने उनका तुष्टीकरणकर उन्हें सभी प्रकारकी सुविधाएं उपलब्ध कराईं । राष्ट्रका न्यायतन्त्र और राजनीतिक व्यवस्थाओंने राष्ट्रकी पन्थनिरपेक्षता सङ्कटमें पडनेके भयसे कश्मीरी हिन्दुओंको न्याय दिलानेसे वंचित रखा है ।”
        स्मरणीय है कि १९ जनवरी १९९० को धर्मान्धोंने ‘मस्जिदों’से ‘हिन्दुओ, कश्मीरसे चले जाओ’के उद्घोष लगाकर हिन्दुओंको कश्मीरसे भगा दिया था । इस घटनाको ३१ वर्ष बीतकर भी अभीतक कश्मीरी हिन्दुओंको न्याय नहीं मिला है । हिन्दुओंको वर्तमान केन्द्र शासनसे अपेक्षा है कि पन्थ निरपेक्षताकी बातोंसे ऊपर उठकर वे शीघ्र ही कश्मीरी हिन्दुओंको न्याय दिलाएं और वहांके धर्मान्ध मुसलमानोंपर अभियोग प्रविष्टकर उन्हें दण्ड दे ! – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ


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