सितम्बर १९, २०१८
‘आरएसएस’द्वारा दिल्लीमें आयोजित त्रिदिवसीय सम्मेलन के दूसरे दिन मंगलवार को भागवत ने स्पष्ट किया कि इस देश में अगर मुसलमान नहीं रहेंगे, तो ये हिन्दुत्व नहीं होगा ! उन्होंने कहा, “हम कहते हैं कि हमारा हिन्दू राष्ट्र है । हिन्दू राष्ट्र है इसका मतलब इसमें मुसलमान नहीं चाहिए, ऐसा बिल्कुल नहीं होता । जिस दिन ये बात कही जाएगी कि यहां मुस्लिम नहीं चाहिए, उस दिन वो हिन्दुत्व नहीं रहेगा ।”
बता दें कि आरएएस हिन्दू राष्ट्र की परिकल्पना के साथ मुस्लिम तुष्टीकरण, धर्मांतरण, गोहत्या, राम मन्दिर, ‘कॉमन सिविल कोड’ जैसे ठोस धार्मिक प्रकरणको उठाता रहा है । उसी ‘आरएसएस’के प्रमुख मोहन भागवत अब मुस्लिम प्रेम की बातें करने लगे हैं । ‘आरएसएस’ क्या गोलवलकर के दौर से बाहर निकलकर २१वीं सदी के मोहन भागवतके आधुनिक परियोजनाको अपनाने जा रहा है या फिर अपने आधारको बढानेके प्रयासमें है । इसके अतिरिक्त संघ भविष्यकी राजनीतिमें अपने आपको सुरक्षित रखनेके लिए जान बूझकर बदलावकी बात कर रहा है ।
अलीगढ मुस्लिम विश्वविद्यालयके प्राध्यापक मोहम्मद सज्जाद कहते हैं कि संघ प्रमुखका वक्तव्य राजनीतिक है । उन्होंने कहा कि उदारवादी हिन्दू, जो विकासके नाम पर बीजेपीसे जुडा था, लिंचिंग और हिंसक घटनाओंके कारण दूर हो रहा है । उन्हें फिर से निकट लानेके कारण ऐसी बातें कही जा रही हैं ।
सज्जाद कहते हैं कि संघ यदि बदलावकी दिशामें बढ रहा है तो उसे वैचारिक परिवर्तन अपने अन्दर करना होगा । इसके लिए पहले सावरकरद्वारा दिए गए हिन्दुत्वके सिद्धान्त, जिसमें वो गैर हिन्दू भारतीयोंको राष्ट्रवादसे भिन्न रखते हैं, को पूर्णरूप से नकारे ! उन्होंने कहा कि लव जेहाद, घर वापसी और गोहत्याके नामपर होने वाली लिंचिंगके विरुद्ध देशव्यापी आन्दोलन छेडे और आरोपियोंको कडे से कडे दण्डके लिए प्रयास करें । प्रोफेसर सज्जाद कहते हैं कि संघको लेकर निरन्तर प्रश्न किए जा रहे हैं ।
“महोदय ! यदि आपका तथाकथित ज्ञान इतना ही कहता है तो आपको इतिहास पुनः पढनेकी आवश्यकता है और आप हिन्दुत्वपर ज्ञान न ही दे तो बडा उपकार होगा । कोटि भारतीय जो आपके अन्धभक्त है, दिशाहीन होने से बच जाएंगे !” – सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : आजतक
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