अक्तूबर २, २०१८
छत्तीसगढके एक सूचनाधिकार कार्यकर्ताने मथुराके जिला प्रशासनसे भगवान कृष्णके जन्म, उनके गांव, उनके द्वारा ब्रजकी लीलाओं आदिके सम्बन्धमें कई जानकारियां मांगी हैं । इन्हें लेकर प्रशासन असमंजसमें है । जिलेके मुख्य जनसूचना अधिकारी एवं उच्च जिलाधिकारी (एडीएम) (कानून एवं व्यवस्था) रमेश चन्द्रका कहना है कि जनमान्यता एवं निजी आस्थासे जुडे इन प्रश्नोंके क्या उत्तर दिए जाएं इसे लेकर असमंजसमें हैं ।
आरटीआई कार्यकर्ता जैनेन्द्र कुमार गेंदलेने ‘जनसूचना अधिकार अधिनियम – २००५’के अन्तर्गत १० रुपएका डाक भेजकर जिला प्रशासनसे पूछा है कि विगत ३ सितम्बरको देश भरमें कृष्ण जन्माष्टमीके अवसरपर अवकाश घोषित कर भगवान कृष्णका जन्मदिवस मनाया गया; इसलिए कृपया उन्हें भगवान श्रीकृष्णके जन्म प्रमाणपत्रकी प्रमाणित प्रतिलिपि उपलब्ध कराई जाए, जिससे यह सिद्ध हो सके कि उनका जन्म उसी दिन हुआ था । उन्हें बताया जाए कि क्या वे सचमें भगवान थे ? और थे, तो कैसे ? उनके भगवान होनेकी प्रमाणिकता भी उपलब्ध कराई जाए । गेंदलेने यह भी पूछा है कि भगवान कृष्णका गांव कौन सा था ? उन्होंने कहां-कहां लीलाएं कीं आदि-आदि । गेंदलेके आधारहीन प्रश्नोंसे उदेडबुनमें पडे एडीएम (कानून एवं व्यवस्था) रमेश चन्द्रका कहना है कि जनमान्यता एवं निजी आस्थासे जुडे इन प्रश्नोंके क्या उत्तर दिए जाएं, इसे लेकर वे असमंजसमें हैं ।
उन्होंने कहा, ‘हिन्दू धर्मसे सम्बन्धित तमाम ग्रन्थों, पुस्तकों आदिमें इस प्रकारके वर्णन हैं कि भगवान कृष्णका जन्म द्वापर युगमें तत्कालीन शौरसेन (जिसे वर्तमानमें मथुराके नामसे जाना जाता है) जनपदमें हुआ था और उन्होंने यहांके राजा कंसका वध करनेके पश्चात द्वारिका गमनसे पूर्व पग-पगपर अनेक लीलाएं की थीं; इसलिए धार्मिक आस्थासे जुडे ऐसे प्रश्नोंके क्या उत्तर दिए जाएं, इस पर विचार किया जा रहा है ।
“यदि हिन्दू माता-पिता जन्मसे ही सन्तानोंको संस्कार व धर्मकी शिक्षा देते तो आज क्या ऐसे विधर्मी हिन्दू हमारे मध्य होते ? इन महाशयने मोहम्मद अथवा यीशुके जन्मके बारेमें तो नहीं पूछा ! ऐसा करनेपर उसकी क्या अवस्था होगी, यह इन बुद्धिजीवियोंको ज्ञात है !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : जनसत्ता
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