जनवरी ३, २०१८
केरलके मुख्यमन्त्री पिनराई विजयनने बुधवार, २ जनवरीको सबरीमला स्थित भगवान अयप्पाके मंदिरमें दो महिलाओंके प्रवेश करनेके पश्चात उसका ‘शुद्धिकरण’ करनेके लिए प्रधान पुजारीपर क्रोध प्रकट किया । पिनराईने कहा कि यदि वह उच्चथम न्यायालयका निर्णय स्वीकार करनेके लिए सज्ज नहीं थे तो उन्हें पद छोड देना चाहिए था । बुधवारको ४२ वर्षीय बिन्दू और ४४ वर्षीय कनकदुर्गाने अयप्पा मंदिरमें प्रवेश कर पूजा की । उसके पश्चात मंदिरके प्रधान पुजारी कंदरारू राजीवारूने मंदिरको बंद कर उसका ‘शुद्धिकरण’ किया । विजयनकी टिप्पणी इसी सन्दर्भमें आई है ।
मुख्यमन्त्रीने कहा, ”अयप्पा मंदिरमें तन्त्रीने (पुजारीने) मंदिरको बंद कर दिया और उसका शुद्धिकरण किया । यह न्यायालयके निर्णयका उल्लंघन है । विजयनने कहा ”इस प्रकरणमें तन्त्री भी एक पक्षकार थे, इसलिए यदि उन्हें आपत्ति थी तो उन्हें पद छोड देना चाहिए था ।
पुजारीने कहा था कि मंदिरमें महिलाओंके प्रवेशसे सबरीमलाकी एक प्राचीश परम्पराका उल्लंघन हुआ है । इसके पश्चात उन्होंने मंदिर बंदकर उसका शुद्धिकरण किया जो विचित्र बात थी ।
बीजेपी और दक्षिण पन्थी संगठनोंने यह कहते हुए शासनके निर्णयका विरोध किया कि यह मंदिरकी प्राचीन परम्पराके विरुद्ध जाएगा । कांग्रेसने भी कहा कि वह श्रद्धालुओंके साथ है । विजयनने कहा कि मंदिरका प्रबन्धन ‘त्रावणकोर देवस्व ओम बोर्ड’ करता है और वही निर्धारित करेगा कि मंदिरको खुला रखा जाए या बंद किया जाए ।
“तामसिक वृत्ति धारण किए ईसाई मुख्यमन्त्रीको शुद्धिकरणका अर्थ समझमें आ सकता है क्या ? और पुजारीको क्यों त्यागपत्र देना चाहिए, वे केवल अपना कर्तव्य निभा रहे हैं । मुख्यमन्त्री जनद्रोह, धर्मद्रोहके कारण राज्यकी व्यवस्था नहीं बना पाए, वे अपने राज्यके हिन्दुओंकी हत्याका कारण बन रहे हैं, इसलिए उन्हें ही त्यागपत्र देना चाहिए और मुख्यमन्त्री ‘देवस्म बोर्ड’की आड लेकर यह कुकृत्य कर रहे हैं; अतः यह मन्दिरके सरकारीकरणका ही दुष्परिणाम है !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : लाइव हिन्दुस्तान
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